कटक : तेरापंथ युवक परिषद, कटक द्वारा मुनिश्री मोहजीत कुमार जी के सान्निध्य में शारदीय पूर्णिमा अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
इस अनुष्ठान में उपस्थित साधकों ने चंद्राकार आकृति में बैठ मुनि जयेश कुमार जी के साथ जैन स्तोत्रों में निहित चंद्र संदर्भ के अनेक विशिष्ट श्लोकों का तरंग सह संगान किया।
मुनि मोहजीत कुमार जी ने शरद पूर्णिमा के महत्व को उजागर करते हुए चंद्रमा की महिमा पर विस्तृत प्रकाश डाला और अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं हेतु विशद चंद्र मंत्रों का विवेचन किया।
इस अवसर पर मुनि जयेश कुमार जी ने कहा कि शरद पूर्णिमा का पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति की स्वच्छता और सकारात्मकता का भी प्रतीक है। वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद इस दिन आकाश पूर्णतः निर्मल और वातावरण विषाक्तता से मुक्त होता है, जिससे यह रात्रि आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इसी कारण, इस रात्रि को अमृतमयी माना जाता है। उन्होंने जैन स्तोत्रों में चन्द्रमा के लिए प्रयुक्त अनेक पर्यायवाची नामों एवं उनके विशिष्ट गुणधर्मों की सारगर्भित प्रस्तुति दी।
अनुष्ठान कर्ताओं ने मंत्रों के समुच्चारण के साथ श्वेत रंग की पवित्र अनुप्रेक्षा कर अलौकिक शांति एवं शीतलता की अनुभूति की।
कार्यक्रम को विशिष्ट एवं अभिनव रूप देने के उद्देश्य से दो चन्द्राकार आकृतियों का निर्माण किया गया। इनमें से एक आकृति में पुरुष अनुष्ठानकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था की गई, जबकि दूसरी आकृति में महिला अनुष्ठानकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था की गई। चन्द्र आकृति में रोशनी का नवीनीकरण स्पॉट रोशनी के माध्यम से किया गया। जिसने अनुष्ठान को अलौलिक दिव्य स्वरूप प्रदान किया ।
अनुष्ठान में सैकड़ों अनुष्ठान कर्ताओं की सहभागिता उनकी साधना के उत्साह को मुखर कर रही थी। कटक, ओडिशा के इतिहास में ऐसा उपक्रम सम्पूर्ण नवीनता एवं आध्यात्मिकता लिए हुए प्रथम बार हुआ।
तेयुप द्वारा प्रायोजक श्री संजय – राजेश सेठिया परिवार का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की सफल आयोजना में तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथ किशोर मंडल के अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।
आभार तेयुप मंत्री चिराग सिंघी ने प्रकट किया।
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