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पुरी में दीवार गिरने से महिला की मौत
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कई तटीय जिलों में गिरे पेड़, यातायात बहाल
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राज्य में आठ जिलों से 28 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
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2,200 से अधिक गर्भवती महिलाएं भी स्थानांतरित
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दक्षिणी ओडिशा में 80 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
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कुछ इलाकों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश की आशंका
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एसआरसी ने कहा-अब तक बड़े नुकसान की सूचना नहीं
भुवनेश्वर। अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान अर्णव की लैंडफॉल प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन इसके प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी और आंतरिक जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश तथा तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश, शहरी निचले इलाकों में जलभराव, नदियों का जलस्तर बढ़ने और सड़क तथा बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई है। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दल तैनात किए हैं। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रभाकर पाटिल ने बताया कि आठ जिलों से लगभग 28 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि, चक्रवात से जुड़ी एक दुखद घटना में पुरी जिले में दीवार गिरने से 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई है।
आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल, छह घंटे तक चली प्रक्रिया
चक्रवात अर्णव ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान की लैंडफॉल प्रक्रिया रात लगभग 1.20 बजे शुरू हुई थी। तूफान ने बापाटला और विशाखापट्टनम के बीच यनम के दक्षिण में तट को पार किया। इस दौरान हवा की निरंतर गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि तेज झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
एसआरसी राजेश प्रभाकर पाटिल के अनुसार, बुधवार सुबह लगभग दो बजे से आठ बजे तक करीब छह घंटे चली लैंडफॉल प्रक्रिया पूरी हुई। इस दौरान चक्रवात की गति धीमी रही और वह काफी समय तक लगभग एक ही क्षेत्र में बना रहा। बाद में यह पूर्वानुमानित दिशा में आगे बढ़ते हुए अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ गया।
आठ जिलों से 28 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
राज्य सरकार ने चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की। एसआरसी ने बताया कि आठ जिलों से लगभग 28 हजार लोगों को स्थानांतरित किया गया है। प्रशासन ने पहले करीब 48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई थी। बारिश और हवा की स्थिति बिगड़ने पर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा।
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। एसआरसी के अनुसार, 2,200 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य सरकार ने चक्रवात आश्रय स्थलों में रह रहे लोगों के लिए पका हुआ भोजन, सूखा खाद्य पदार्थ और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
प्रभावित क्षेत्रों से करीब एक लाख को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
इससे पहले राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों से करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि 4,072 गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई है, जिनमें से करीब 2,000 को अस्पतालों और चक्रवात आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया था। दोनों आंकड़े अलग-अलग समय पर जारी किए गए बयानों से संबंधित हैं।
दक्षिणी ओडिशा में 80 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
आईएमडी के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय महापात्र ने चेतावनी दी है कि चक्रवात की धीमी गति के कारण दक्षिणी ओडिशा में बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है। कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी ओडिशा में हवा की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। छत्तीसगढ़ से सटे आंतरिक जिलों में हवा के झोंकों की गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है।
लगातार भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले शहरी इलाकों में जलभराव होने और सड़कों पर आवागमन बाधित होने का खतरा है। बिजली आपूर्ति और स्थानीय परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
पुरी में दीवार गिरने से महिला की मौत
चक्रवात से जुड़ी एक दर्दनाक घटना पुरी जिले के अस्तरंग प्रखंड के जेनापुर गांव में हुई। यहां 40 वर्षीय लोभामति मुदुली की मकान की दीवार गिरने से मौत हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लोभामति रसोई में खाना बना रही थीं। इसी दौरान तेज हवा के कारण रसोई के पास स्थित एक बड़ा पेड़ उखड़कर पास की ईंट की दीवार पर गिर गया। पेड़ के टकराने से दीवार ढह गई और महिला मलबे के नीचे दब गईं।
परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें मलबे से निकालकर तत्काल चरिचक अस्पताल पहुंचाया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल रेफर किया, लेकिन वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार को शीघ्र मुआवजा और राहत सहायता देने की मांग की है।
अंडमान सागर में नया मौसमी तंत्र विकसित
चक्रवात अर्णव के प्रभाव के बीच आईएमडी महानिदेशक ने अंडमान सागर में एक नया चक्रवाती परिसंचरण बनने की भी जानकारी दी है। इसके आगे चलकर कम दबाव के क्षेत्र में केंद्रित होने की संभावना है। हालांकि, इस नए मौसमी तंत्र की दिशा और भारतीय तट पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर अभी निगरानी की जा रही है।
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