भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अर्णव के प्रभाव को देखते हुए यात्रियों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे तथा जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। पूर्व तट रेलवे ने कई एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों को रद्द करने के साथ कुछ ट्रेनों का परिचालन सीमित किया है। वहीं, कोरापुट जिला प्रशासन ने 27 से 29 अक्टूबर तक सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित की है।
कई प्रमुख ट्रेनें रद्द
पूर्व तट रेलवे के अनुसार, विशाखापट्टनम-किरंदुल एक्सप्रेस (18515/18516) को 29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाली निर्धारित सेवाओं के लिए रद्द किया गया है। राउरकेला-जगदलपुर एक्सप्रेस (18107/18108) 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक रद्द रहेगी। हावड़ा-जगदलपुर एक्सप्रेस (18005/18006) की निर्धारित सेवाएं 27 से 31 अक्टूबर के बीच प्रभावित रहेंगी।
इसके अलावा विशाखापट्टनम-कोरापुट और विशाखापट्टनम-किरंदुल मार्गों पर चलने वाली कई यात्री ट्रेनें भी 27 से 31 अक्टूबर के बीच रद्द की गई हैं। इनमें ट्रेन संख्या 58538/58537 और 58501/58502 शामिल हैं।
भुवनेश्वर-जगदलपुर एक्सप्रेस (18447) को 27 से 30 अक्टूबर तक रायगड़ा स्टेशन पर ही समाप्त किया जाएगा। वहीं, वापसी की ट्रेन संख्या 18448 निर्धारित अवधि में रायगड़ा से ही अपनी यात्रा शुरू करेगी। इससे आगे की यात्रा करने वाले यात्रियों को असुविधा हो सकती है।
रेलवे ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी है। इसके लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, आईआरसीटीसी या नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) का उपयोग किया जा सकता है।
कोरापुट में 29 अक्टूबर तक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
चक्रवात की आशंका और भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर कोरापुट जिला प्रशासन ने सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को 27, 28 और 29 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश जारी किया है।
कोरापुट के जिलाधिकारी की ओर से 26 अक्टूबर को जारी आदेश में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, छुट्टी के दौरान भी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों को सामान्य कार्यावधि में अपने-अपने संस्थानों में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को आदेश के अनुपालन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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