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लोगों ने कहा-दोनों राज्यों में वोट देंगे
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आंध्र प्रदेश के पंचायत चुनाव से पहले कोरापुट के सीमावर्ती गांवों में प्रचार तेज
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प्रशासन ने हटाए कथित अवैध पोस्टर
कोरापुट। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। आंध्र प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों से पहले कोरापुट जिले के नंदापुर प्रखंड के सीमावर्ती गांवों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इन गांवों में आंध्र प्रदेश समर्थित उम्मीदवारों के पोस्टर लगाए जाने और चुनाव प्रचार दलों के पहुंचने की खबरों के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कुछ ग्रामीणों ने कहा है कि वे दोनों राज्यों के चुनावों में मतदान करेंगे।
नंदपुर प्रखंड की पंथलुंग, गोलुर, चत्वा, खिनबार और बिलापुट जैसी सीमावर्ती पंचायतों में आंध्र प्रदेश के उम्मीदवारों के पोस्टर प्रमुखता से दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि आंध्र प्रदेश के चुनाव प्रचार दल गांवों में जाकर लोगों से मतदान करने की अपील कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकार और मतदाता पंजीकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने किया दौरा
कोरापुट के जिलाधिकारी मधुसूदन दास के निर्देश पर प्रशासन की एक उच्चस्तरीय टीम ने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। इस दल में नंदपुर प्रखंड विकास अधिकारी दुर्गा प्रसाद, तहसीलदार देवव्रत महाराणा और पड़वा थाना प्रभारी टूना पिडिका सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे।
टीम ने रायपहाड़ा गांव में ग्रामीणों से बातचीत की और ओडिशा सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत संचालित विकास कार्यों की जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ओडिशा की सीमा के भीतर आंध्र प्रदेश की ओर से कोई आधिकारिक मतदान केंद्र स्थापित नहीं किया गया है।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों के सहयोग से राज्य की सीमा के भीतर लगाए गए कथित अवैध चुनावी पोस्टरों को हटाया। साथ ही, मुचिंगपुट, आद्रकोटा, मालिपुट, कंद्रुम और गोरापुर में आंध्र प्रदेश की ओर से स्थापित मतदान केंद्रों पर भी निगरानी रखी जा रही है।
दोनों राज्यों के पहचान पत्र और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ
सीमावर्ती गांवों की स्थिति को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पास ओडिशा और आंध्र प्रदेश, दोनों राज्यों की ओर से जारी पहचान संबंधी दस्तावेज हैं। इनमें मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और रोजगार संबंधी जॉब कार्ड शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों के कई परिवार दोनों राज्यों की सरकारों से विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं। इनमें आवास सहायता, बिजली कनेक्शन, शिक्षा संबंधी मदद और मासिक पेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों राज्यों से मिलने वाली सहायता उनके जीवन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। इसी कारण वे किसी भी राज्य के खिलाफ जाने के पक्ष में नहीं हैं।
तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश चुनाव में मतदान करने की बात
ग्रामीणों ने कथित तौर पर कहा है कि वे तीन नवंबर को होने वाले आंध्र प्रदेश के पंचायत चुनाव में मतदान के लिए सीमा पार जाएंगे। साथ ही, जब ओडिशा में स्थानीय चुनाव होंगे, तब वे यहां के उम्मीदवारों के पक्ष में भी मतदान करेंगे।
ग्रामीणों के इस रुख ने सीमावर्ती क्षेत्रों में दोहरी मतदाता पंजीकरण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, दोनों राज्यों में पहचान पत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज होना अपने आप में दो जगह मतदान करने का कानूनी अधिकार नहीं देता। मतदाता पंजीकरण और मतदान की पात्रता संबंधित चुनाव कानूनों और निर्वाचन सूची के नियमों के अनुसार निर्धारित होती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चिंता
सीमावर्ती क्षेत्रों में दोहरे मतदाता पंजीकरण की आशंका को लेकर स्थानीय राजनीतिक नेताओं और बुद्धिजीवियों ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति से प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र, मतदाता सूची की शुद्धता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने कोरापुट जिला प्रशासन और ओडिशा सरकार से सीमावर्ती मतदान केंद्रों पर लगातार निगरानी रखने तथा गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों को मजबूत करके सीमावर्ती समुदायों का विश्वास कायम करना जरूरी है।
ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा पर सामने आया यह मामला केवल चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमा क्षेत्र में प्रशासनिक नियंत्रण, मतदाता पंजीकरण और दोनों राज्यों की कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से भी जुड़ा है।
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