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16 नर्सिंग कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस
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बालेश्वर में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद हरकत में आयी परिषद
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दो दिन में मांगी रिपोर्ट
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बिना परीक्षा और पंजीकरण के अधर में लटका हजारों विद्यार्थियों का भविष्य
भुवनेश्वर/बालेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले में वर्षों से परीक्षा का इंतजार कर रहे नर्सिंग छात्रों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। अपने भविष्य को अंधकार में जाता देख सैकड़ों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा नर्सिंग एंड मिडवाइव्स रजिस्ट्रेशन काउंसिल (ओएनएमआरसी) ने जिले के 16 नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
परिषद ने कॉलेजों से पूछा है कि छात्रों का प्रवेश लेने के बावजूद अब तक उनकी परीक्षाएं क्यों आयोजित नहीं कराई गईं और इस गंभीर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। परिषद ने निर्धारित समय के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
छह साल बीत गए, एक भी परीक्षा नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग और जीएनएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अनेक छात्रों ने बताया कि उन्हें कॉलेज में दाखिला लिए छह वर्ष तक हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी एक भी विश्वविद्यालय परीक्षा आयोजित नहीं हुई। इतना ही नहीं, कई छात्रों का विधिवत पंजीकरण भी नहीं कराया गया, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।
छात्रों का आरोप है कि कुछ निजी नर्सिंग कॉलेजों ने आवश्यक मान्यता और स्वीकृतियां पूरी किए बिना ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद न तो परीक्षा कराई गई और न ही विद्यार्थियों को किसी प्रकार की स्पष्ट जानकारी दी गई। परिणामस्वरूप छात्रों के समय, धन और करियर-तीनों पर संकट खड़ा हो गया।
फकीर मोहन विश्वविद्यालय के बाहर फूटा छात्रों का आक्रोश
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब सैकड़ों नर्सिंग छात्र फकीर मोहन विश्वविद्यालय के बाहर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वर्षों से परीक्षा नहीं होने पर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित छात्रों ने कुलपति का घेराव कर दिया। विरोध के दौरान धक्का-मुक्की की भी खबर सामने आई, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
उच्च शिक्षा मंत्री का भी किया घेराव
छात्रों का विरोध यहीं नहीं रुका। अगले दिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी जिला कलेक्टर कार्यालय के निकट एकत्र हुए और जिले के दौरे पर पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज का घेराव कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
छात्रों ने मंत्री के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों की पढ़ाई के बाद भी परीक्षा नहीं होने से उनका भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो गया है। उन्होंने सरकार से दोषी संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा जल्द से जल्द परीक्षा आयोजित कराने की मांग की।
दबाव बढ़ने पर हरकत में आया परिषद
लंबे समय से छात्रों की शिकायतों के बावजूद निष्क्रिय रहने के आरोपों का सामना कर रहे ओएनएमआरसी ने आखिरकार आंदोलन तेज होने के बाद कार्रवाई शुरू की। परिषद ने 16 नर्सिंग कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दो दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
परिषद यह भी जांच करेगी कि संबंधित संस्थानों ने प्रवेश प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की, क्या उनके पास आवश्यक मान्यताएं थीं, छात्रों का पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया तथा परीक्षा आयोजित कराने में आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई।
नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने ओडिशा की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपये फीस के रूप में जमा किए, वर्षों तक नियमित रूप से पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा और डिग्री के अभाव में उनका करियर ठहर गया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना आवश्यक मान्यता और नियामकीय स्वीकृति के संस्थान छात्रों का प्रवेश ले रहे हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
सरकार से त्वरित समाधान की उम्मीद
छात्रों और अभिभावकों को अब उम्मीद है कि सरकार इस मामले में केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोषी संस्थानों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। साथ ही वर्षों से लंबित परीक्षाओं का शीघ्र आयोजन कराकर हजारों नर्सिंग छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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