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अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने की उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में समीक्षा
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026 मौसम के लिए अपनी तैयारियों को और मजबूत करते हुए संभावित अल नीनो प्रभावों से निपटने हेतु व्यापक रणनीति तैयार की है। इस संबंध में मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस समीक्षा बैठक में राज्य की कृषि तैयारियों और जोखिम प्रबंधन उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में उपमुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव के साथ कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव, कृषि निदेशक शुभम सक्सेना, मृदा संरक्षण निदेशक सुभ्रत कुमार पंडा तथा उद्यानिकी निदेशक कलुंगे गोरख वामन सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दीर्घकालिक औसत (अलपीए) के 92 प्रतिशत रहने का अनुमान जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने देवगढ़, सुंदरगढ़, केंदुझर, मयूरभंज, कोरापुट, रायगड़ा, मालकानगिरि और नवरंगपुर जिलों को विशेष निगरानी के दायरे में रखा है। प्रशासन द्वारा बुवाई में संभावित देरी, मिट्टी में नमी की कमी, जलाशयों में जल उपलब्धता में गिरावट तथा कीट प्रकोप जैसी चुनौतियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने 57.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाला खरीफ फसल कार्यक्रम तैयार किया है। किसानों को रियायती दरों पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही, मध्य-मौसम की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 14,350 क्विंटल बीजों का रणनीतिक भंडार तैयार किया गया है, जिसमें 7,500 क्विंटल धान बीज और 6,850 क्विंटल गैर-धान बीज शामिल हैं।
उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुल 11.42 लाख मीट्रिक टन मौसमी आवश्यकता के मुकाबले अब तक 6.40 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की व्यवस्था कर ली है, जिससे किसानों को खेती के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार तकनीक और जनसहभागिता दोनों का उपयोग कर रही है। ‘कृषि समृद्धि हेल्पलाइन’ के आईवीआरएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक मौसम आधारित कृषि परामर्श पहुंचाए जा रहे हैं। इसके अलावा, सभी जिलों और प्रखंडों में ‘खेत बचाओ अभियान’ तथा प्राकृतिक खेती पर कार्यशालाओं का आयोजन कर टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि किसानों को जलवायु संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए राज्य सरकार ने सक्रिय और बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की विशेषज्ञ टीमों को कीट निगरानी और प्रबंधन के लिए सतर्क रखा गया है। साथ ही, किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) से अधिकाधिक जोड़ने के प्रयास तेज किए गए हैं, ताकि उन्हें फसल क्षति की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर फसल आकस्मिकता (क्रॉप कंटिन्जेंसी) योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है। जिलों को ब्लॉक स्तर पर भी आकस्मिकता योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसी भी प्रतिकूल मौसम परिस्थिति का स्थानीय स्तर पर त्वरित और प्रभावी समाधान किया जा सके।
राज्य सरकार का लक्ष्य संभावित अल नीनो प्रभावों को न्यूनतम करते हुए किसानों के हितों की रक्षा करना तथा खरीफ मौसम के दौरान कृषि क्षेत्र में सतत और स्थिर विकास सुनिश्चित करना है।
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