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एल नीनो की चुनौती से निपटने को तैयार ओडिशा

  •     मुख्यमंत्री माझी ने दोहराया ‘जीरो कैजुअल्टी’ का संकल्प

  •     राज्य स्तरीय प्राकृतिक आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में आपदा तैयारी की समीक्षा

  •     911 चक्रवात आश्रय केंद्रों के रखरखाव के लिए 6-6 लाख रुपये मंजूर

भुवनेश्वर। इस वर्ष मानसून के दौरान एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन और कृषि सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने लोक सेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय प्राकृतिक आपदा प्रबंधन समिति (एसएलएनडीएमसी) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट कहा कि ओडिशा की विश्वप्रसिद्ध और मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को “होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच” के तहत समन्वित रूप से कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि संभावित कम वर्षा की स्थिति से निपटने और खरीफ फसलों तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प बिल्कुल स्पष्ट और अडिग है-जीरो कैजुअल्टी। आपदा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही के प्रति शून्य सहनशीलता बरती जाएगी।

चक्रवातों के दौरान सफल प्रबंधन का दिया उदाहरण

बैठक में राज्य के हालिया आपदा प्रबंधन अनुभवों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल में आए चक्रवात ‘डाना’ और ‘मोंथा’ के दौरान 11 प्रभावित जिलों से लगभग 38 हजार लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। इसके लिए 33 ओड्राफ टीमों, 5 एनडीआरएफ इकाइयों और 123 अग्निशमन सेवा इकाइयों को तैनात किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा के दीर्घकालिक आपदा न्यूनीकरण मॉडल की हाल ही में पुरी में आयोजित ब्रिक्स देशों की तकनीकी बैठक में भी सराहना की गई थी।

911 चक्रवात आश्रय केंद्रों के रखरखाव के लिए राशि मंजूर

बैठक में राज्य के सभी 911 बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रय केंद्रों के वार्षिक रखरखाव के लिए प्रत्येक केंद्र को 6 लाख रुपये मंजूर करने का निर्णय लिया गया। इस राशि का उपयोग पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और भोजन पकाने जैसी आवश्यक सुविधाओं को हर समय तैयार रखने के लिए किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में तत्काल उपयोग किया जा सके।

कृषि विभाग तैयार करेगा विशेष योजना

संभावित एल नीनो प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग को व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना (कंटीजेंसी प्लान) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों और फसलों को किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति से सुरक्षित रखना है।

राज्य स्तर पर वर्षा, जलस्तर, फसल योजना और उर्वरक आपूर्ति की निगरानी के लिए मजबूत तंत्र पहले से सक्रिय है। सभी जिला कलेक्टरों को नैनो यूरिया का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक पंचायत में गठित निरीक्षण समितियों के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

अफवाहों पर रोक के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल प्लेटफॉर्म का उपयोग

आपदा या संकट की स्थिति में अफवाहों पर नियंत्रण के लिए सरकार सोशल मीडिया और मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सही और त्वरित जानकारी उपलब्ध कराएगी। राज्य का 24 घंटे संचालित आपात नियंत्रण कक्ष, 112 हेल्पलाइन तथा एसएमएस आधारित कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) पूरी तरह सक्रिय रखे गए हैं।

बेमौसम बारिश को घोषित किया गया राज्य-विशिष्ट आपदा

सरकार ने ‘अडिनिया बरसा’ (बेमौसम बारिश) को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया है। इस निर्णय से प्रभावित किसानों को राहत और सहायता तेजी से उपलब्ध कराई जा सकेगी।

ओड्राफ और अग्निशमन सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा

वर्तमान में राज्य में 20 पूर्ण सुसज्जित ओड्राफ टीमें और 347 आधुनिक अग्निशमन केंद्र कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 10 नई ओड्राफ इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया जाएगा।

राहत कार्यों और भविष्य की योजना पर हुई चर्चा

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बैठक में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के प्रभावी उपयोग, त्वरित राहत और पुनर्बहाली कार्यों की जानकारी दी।

बैठक में उपस्थित सांसदों और विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े अनुभव और सुझाव साझा किए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इन सुझावों को भविष्य की योजनाओं और रणनीतियों में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में आपदा प्रबंधन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता का संयुक्त मिशन है।

उन्होंने दोहराया कि लोगों के जीवन और आजीविका की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में उपमुख्यमंत्री केवी सिंहदेव, वरिष्ठ मंत्री, विधायक, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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