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ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से उठाया कदम
भुवनेश्वर। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा और ईंधन संकट को देखते हुए ओडिशा सरकार ने सरकारी वाहनों के उपयोग को तर्कसंगत बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इस संबंध में राज्य के वित्त विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर सभी विभागों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है।
कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते ईंधन और ऊर्जा संबंधी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
नए निर्देशों के अनुसार, केवल विशेष सचिव (स्पेशल सेक्रेटरी) और उससे ऊपर के पद पर कार्यरत अधिकारियों को ही आधिकारिक कार्यों के लिए विशेष सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जून 2026 या उसके बाद अतिरिक्त सचिव (एडिशनल सेक्रेटरी) पद पर पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को पूल वाहन प्रणाली का उपयोग करना होगा। ऐसे अधिकारी अतिरिक्त सचिव के पद पर तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद ही स्वतंत्र सरकारी वाहन के पात्र होंगे।
इसके अलावा, प्रशासनिक विभागों में कार्यरत अवर सचिव (अंडर सेक्रेटरी) से लेकर संयुक्त सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी) स्तर तक के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागाध्यक्ष कार्यालयों में समकक्ष पदों पर कार्यरत अधिकारियों को साझा वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निर्देश के अनुसार कम से कम दो से तीन अधिकारी एक ही पूल वाहन का उपयोग करेंगे।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को यह भी सलाह दी है कि राज्य के भीतर दूरस्थ स्थानों की यात्रा के दौरान सरकारी वाहनों के बजाय बस या रेल सेवाओं का अधिकाधिक उपयोग करें।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से ईंधन की खपत में कमी आएगी तथा मौजूदा ऊर्जा संकट के दौरान सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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