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ओडिशा में 500 करोड़ की वाटरफ्रंट विकास योजना को मंजूरी

  •     नदी तटों और शहरी जलाशयों का होगा कायाकल्प

  •     पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और शहरी जीवन गुणवत्ता को मिलेगा बढ़ावा

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने सतत और समावेशी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 500 करोड़ रुपये की वाटरफ्रंट विकास योजना को मंजूरी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी योजना अगले पांच वर्षों में राज्य के विभिन्न शहरों में लागू की जाएगी और इसका उद्देश्य नदी तटों तथा शहरी जल निकायों का पुनर्जीवन कर उन्हें आकर्षक, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक स्थलों में विकसित करना है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को स्वीकृति दी गई। योजना के कार्यान्वयन, समन्वय और निगरानी की जिम्मेदारी आवास एवं शहरी विकास विभाग को सौंपी गई है, जो विकास प्राधिकरणों और शहरी स्थानीय निकायों के सहयोग से इसे क्रियान्वित करेगा।

शहरों को मिलेंगे आधुनिक और जनहितैषी सार्वजनिक स्थल

सरकार के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य नदी तटों और जल निकायों के आसपास ऐसे सार्वजनिक स्थलों का विकास करना है, जो सभी वर्गों के लोगों के लिए सुरक्षित, सुलभ और उपयोगी हों। इन क्षेत्रों को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि स्थानीय निवासी, पर्यटक और समुदाय के लोग वहां मनोरंजन, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों का आनंद ले सकें।

योजना के तहत निरंतर और समावेशी वाटरफ्रंट कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे शहरों की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

पर्यावरण संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन पर जोर

वाटरफ्रंट विकास योजना का प्रमुख उद्देश्य नदी और जलाशयों के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है। इसके तहत पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक और टिकाऊ उपाय अपनाए जाएंगे। जल निकायों की सफाई, हरित क्षेत्र का विकास और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे शहरी क्षेत्रों में पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार होगा और लोगों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिलेगा।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति

योजना से पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। विकसित वाटरफ्रंट क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्थानीय कला एवं हस्तशिल्प गतिविधियों तथा पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को नए पर्यटन आकर्षण केंद्रों के रूप में विकसित करना है, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।

सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का होगा संरक्षण

योजना के तहत नदी तटों और जलाशयों से जुड़ी स्थानीय सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय पहचान को मजबूती मिलेगी और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

जलवायु परिवर्तन और बाढ़ प्रबंधन में मिलेगी मदद

वाटरफ्रंट विकास योजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में भी सहायक बनेगी। इसके तहत आधुनिक बाढ़ प्रबंधन प्रणालियों और अनुकूलन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, जिससे शहरी क्षेत्रों की जलवायु सहनशीलता बढ़ेगी।

सामाजिक समावेशन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये की यह योजना ओडिशा के शहरों को अधिक हरित, सुंदर, पर्यावरण-अनुकूल और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है। इससे राज्य में सतत शहरी विकास, पर्यटन संवर्धन और जीवन गुणवत्ता में व्यापक सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा।

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