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26 करोड़ रुपये के निवेश से शोध को मिलेगा बढ़ावा
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मस्तिष्क स्वास्थ्य से लेकर नैनो विज्ञान तक होंगे उन्नत अनुसंधान
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पहले से संचालित हैं 22 उत्कृष्टता केंद्र
भुवनेश्वर। उच्च शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने राज्य के पांच सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में छह नए उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन केंद्रों की स्थापना पर कुल 26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, भुवनेश्वर स्थित रामा देवी महिला विश्वविद्यालय में 3.75 करोड़ रुपये की लागत से ‘सतत विकास के लिए सूक्ष्मजीव अनुसंधान केंद्र’ स्थापित किया जाएगा।
संबलपुर विश्वविद्यालय में 5.85 करोड़ रुपये की लागत से प्राकृतिक उत्पादों पर ट्रांसलेशनल रिसर्च केंद्र की स्थापना होगी। वहीं गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय में दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें नैनो विज्ञान एवं ऊर्जा भंडारण केंद्र के लिए 3.75 करोड़ रुपये तथा सार्वजनिक नीति एवं सुशासन पर दीनदयाल उपाध्याय केंद्र के लिए 1.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
उत्कल विश्वविद्यालय में 5.85 करोड़ रुपये की लागत से मस्तिष्क स्वास्थ्य एवं न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों पर केंद्रित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होगा। वहीं फकीर मोहन विश्वविद्यालय में 5.25 करोड़ रुपये के निवेश से स्मार्ट मैटेरियल और थिन फिल्म्स पर अनुसंधान के लिए विशेष केंद्र बनाया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इन उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से विश्वविद्यालयों को अत्याधुनिक अनुसंधान अवसंरचना उपलब्ध होगी। साथ ही शोधकर्ताओं और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालय ज्ञान सृजन और अनुसंधान के अग्रणी केंद्रों के रूप में विकसित हो सकेंगे।
वर्तमान में राज्य के आठ सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में 22 उत्कृष्टता केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश की स्थापना विश्व बैंक समर्थित ‘ओडिशा उच्च शिक्षा उत्कृष्टता एवं समानता कार्यक्रम’ (ओएचईपीईई) के तहत की गई थी। प्रत्येक केंद्र की स्थापना पर लगभग 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
इन केंद्रों में प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों पर ओडिशा-केंद्रित अनुप्रयुक्त अनुसंधान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन अनुसंधान केंद्रों से अब तक 1,000 से अधिक पेटेंट प्राप्त हो चुके हैं, जबकि कई अन्य पेटेंट आवेदन प्रक्रिया में हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित न रखकर उन्हें अनुसंधान-प्रधान संस्थानों के रूप में विकसित करना है। नए उत्कृष्टता केंद्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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