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अब तक आयोजित 17 चरणों में प्राप्त शिकायतों में से 96 प्रतिशत शिकायतों का समाधान
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पिछले दो वर्षों में जिला स्तर पर 2.40 लाख शिकायतों की सुनवाई की गई, जिनमें से 92 प्रतिशत मामलों का निस्तारण
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मुख्यमंत्री के साथ 13 मंत्रियों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, विभागीय सचिवों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भी लोगों की शिकायतें सुनीं
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जन शिकायत सुनवाई अब राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का एक अभिन्न और प्रभावी हिस्सा बन चुकी है : मुख्यमंत्री
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को यूनिट-2 स्थित मुख्यमंत्री जन शिकायत प्रकोष्ठ में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के 18वें चरण में लोगों की शिकायतें सुनीं। इस अवसर पर राज्य मंत्रिमंडल के 13 वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित रहे और विभिन्न मामलों में शिकायतकर्ताओं की समस्याओं पर विचार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार की शिकायत निवारण प्रणाली प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई कार्यक्रम के माध्यम से आम लोग सीधे सरकार और प्रशासन तक अपनी समस्याएं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सबसे पहले बाहर प्रतीक्षारत 30 दिव्यांग एवं गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पंजीकृत शिकायतकर्ताओं की सुनवाई की गई।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित 13 लोगों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से 3.60 लाख रुपये की चिकित्सा सहायता मंजूर की। इसके अलावा, नयागढ़ जिले की कामाक्षी साहू को उनके पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये की अनुकंपा सहायता राशि स्वीकृत की गई।
आज की जनसुनवाई में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से 600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। राज्य सरकार के अनुसार, पिछले 17 चरणों में प्राप्त 14,651 शिकायतों में से 14,046 मामलों का समाधान किया जा चुका है, जो कुल शिकायतों का लगभग 96 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत निवारण प्रक्रिया को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। गर्मी का मौसम समाप्त होने के बाद भुवनेश्वर के अलावा राज्य के विभिन्न जिलों में भी मुख्यमंत्री जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि दूर-दराज के लोगों को अपनी शिकायतों के लिए राजधानी आने की आवश्यकता न पड़े और प्रशासन स्वयं उनके पास पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर सके।
उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक नियमित रूप से जन शिकायतें सुन रहे हैं, जबकि तहसील और ब्लॉक स्तर पर भी शिकायत निवारण व्यवस्था सक्रिय रूप से संचालित हो रही है। अप्रैल 2026 तक जिला स्तर पर लगभग 2.40 लाख शिकायतों की सुनवाई की जा चुकी है, जिनमें से 92 प्रतिशत मामलों का समाधान किया गया है।
आज मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री एवं कृषि एवं किसान सशक्तिकरण मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव , राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी , विद्यालय एवं जनशिक्षा तथा अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री नित्यानंद गोंड, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग, वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री विभुति भूषण जेना , पंचायती राज, पेयजल एवं ग्रामीण विकास मंत्री रवि नारायण नायक , आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्णचंद्र महापात्र , खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्णचंद्र पात्र , उच्च शिक्षा, ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज , उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संपद स्वाईं , वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया , सहकारिता, हथकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प मंत्री प्रदीप बल सामंत तथा मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मलिक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और लोगों की शिकायतें सुनीं।
गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा , मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव शाश्वत मिश्र , सामान्य शिकायत एवं सामान्य प्रशासन विभाग के विशेष सचिव सुरेश वशिष्ठ तथा विभिन्न विभागों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और शिकायत सुनवाई प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया।
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