वित्त विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) के माध्यम से यह नई नीति लागू की है।
ज्ञापन के अनुसार, सरकारी विभागों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए इलेक्ट्रिक वाहन निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर होने चाहिए। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीशों तथा मंत्रियों के लिए वाहन खरीद की अधिकतम सीमा 30 लाख रुपये तय की गई है।
मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव एवं समकक्ष अधिकारियों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वहीं जिला न्यायाधीश, जिलाधिकारी (कलेक्टर), पुलिस अधीक्षक (एसपी) तथा समान रैंक के अधिकारियों के लिए अधिकतम लागत 20 लाख रुपये तय की गई है।
नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए तथा वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही की जा सकेगी। इसके अलावा नया वाहन तभी खरीदा जाएगा जब मौजूदा वाहन अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर चुका हो और उसे अनुपयोगी घोषित कर स्क्रैप कर दिया गया हो।
सरकार ने विभागों को यथासंभव सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के माध्यम से वाहन खरीदने की सलाह भी दी है।
दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल टाटा मोटर्स, महिंद्रा और मारुति द्वारा निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों की ही खरीद की जा सकेगी। साथ ही प्रधान सचिव स्तर के किसी भी अधिकारी को एक से अधिक सरकारी वाहन खरीदने की अनुमति नहीं होगी।
इस बीच पेट्रोल और डीजल वाहनों की खरीद पर भी सख्ती बरती गई है। ऐसे वाहनों की खरीद केवल विशेष परिस्थितियों में और वित्त विभाग की अनुमति से ही की जा सकेगी।
यह नई व्यवस्था राज्य सरकार के सभी विभागों के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त उपक्रमों, संस्थानों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न सरकारी सोसाइटियों पर भी लागू होगी।
राज्यपाल की मंजूरी से जारी यह आदेश 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।
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