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कटक के केशव धाम में संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) के समारोप समारोह
कटक। कटक के केशव धाम, गतिराउत पाटना स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ओडिशा (पूर्व) प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) के समारोप समारोह में पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यवाह दुर्गा प्रसाद साहू ने “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज में व्यापक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित कर आत्महीनता की भावना दूर करना तथा चरित्र निर्माण के जरिए परम वैभवशाली भारत का निर्माण करना ही संघ का मूल उद्देश्य है, जिसके लिए संघ पिछले सौ वर्षों से कार्यरत है।
दुर्गा प्रसाद साहू ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्र के जागरण का सतत प्रयास है। उन्होंने हिंदुत्व को मानवता, सहिष्णुता, कर्तव्यबोध और विश्व कल्याण पर आधारित जीवन दर्शन बताया। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यपद्धति “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के सिद्धांत पर आधारित है।
अपने संबोधन में उन्होंने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंद मठ’ का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि भारत माता के वैभवशाली भविष्य का स्वप्न तभी साकार होगा, जब समाज स्वयं को राष्ट्रमाता की संतान मानकर एकजुट होगा।
डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के चिंतन का उल्लेख
डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के चिंतन का उल्लेख करते हुए साहू ने कहा कि उन्होंने यह समझा था कि केवल अंग्रेजों को देश से बाहर करने से समस्या समाप्त नहीं होगी, बल्कि हिंदू समाज में व्याप्त आत्मविस्मृति, स्वार्थ, अनुशासनहीनता और संगठनहीनता जैसी कमजोरियों को दूर करना भी आवश्यक है। इन्हीं दोषों को समाप्त कर समाज को संगठित करने के उद्देश्य से संघ की स्थापना हुई।
संघ की दैनिक शाखाओं के बारे में बताया
उन्होंने कहा कि संघ की दैनिक शाखाएं अनुशासन, चरित्र निर्माण और राष्ट्र प्रथम की भावना विकसित करती हैं। संघ से प्रेरित विभिन्न संगठन भी अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर कार्य कर रहे हैं। भारतीय मजदूर संघ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने श्रमिक आंदोलन को “देश हित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम” जैसे सकारात्मक दृष्टिकोण से जोड़ा।
संघ की देशभर में डेढ़ लाख से अधिक सेवा परियोजनाएं
साहू ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय स्वयंसेवक सबसे पहले राहत कार्यों में पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि संघ देशभर में डेढ़ लाख से अधिक सेवा परियोजनाएं संचालित कर रहा है। उन्होंने हिंदू दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति, मानव और ईश्वर के बीच एकात्म संबंध की बात करती है, इसलिए यहां नदियों, वृक्षों और प्रकृति को मातृस्वरूप माना गया है।
विकृतियों को समाप्त करने पर जोर
उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी विकृतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। भाषा, जाति और प्रांत के आधार पर समाज को बांटने की कोशिशों को विफल कर सामाजिक समरसता स्थापित करने का आह्वान किया।
स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग व्यवहारिक हिंदुत्व
“पंच परिवर्तन” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चेतना, नागरिक कर्तव्य और कुटुंब प्रबोधन शामिल हैं। उन्होंने प्लास्टिक का उपयोग कम करने, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को व्यवहारिक हिंदुत्व बताया। साथ ही संविधान पालन, मतदान, यातायात नियमों के पालन और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया।
परिवार व्यवस्था भारतीय समाज की मूल इकाई
परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की मूल इकाई बताते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार परंपरा और बच्चों में संस्कार निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा अध्यात्म में निहित है और विश्व कल्याण के लिए भारत का पुनर्जागरण आवश्यक है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं ओडिशा माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक डॉ मिहिर दास ने संघ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संघ पिछले सौ वर्षों से राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण का कार्य कर रहा है।
19 जिलों के 183 स्थानों से 308 शिक्षार्थियों ने भाग लिया
उल्लेखनीय है कि 9 मई से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में ओडिशा पूर्व प्रांत के 19 जिलों के 183 स्थानों से 308 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। वर्ग में शारीरिक, बौद्धिक तथा सेवा-संपर्क संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
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