भुवनेश्वर। ओडिशा में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को लेकर बड़ा श्रमिक आंदोलन उभरकर सामने आया है। राजधानी भुवनेश्वर स्थित गांधी मार्ग पर 18 मई से जारी सत्याग्रह में 10 हजार से अधिक आउटसोर्सिंग और अनुबंध कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। तपतपाती धूप एवं 40 डिग्री तापमान व असहनीय़ गर्मी के बीच यह कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं । आंदोलनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है और उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराणा ने कहा कि राज्य के बिजली, खनन, इस्पात, स्वास्थ्य और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों के दौरान 15 हजार से अधिक श्रमिकों की छंटनी की गई है। उनका आरोप है कि शासन परिवर्तन के बाद स्थानीय ओड़िया श्रमिकों की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
बीएमएस के अनुसार, बिजली विभाग में बुनियादी ढांचे के विस्तार के बावजूद तकनीकी कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि 10 से 25 वर्षों तक कार्यरत अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय सेवा से हटाया जा रहा है।
इस बीच, आंदोलनकारी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 10 वर्ष या उससे अधिक समय से संविदा अथवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का निर्देश दिया है। बीएमएस का कहना है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करता है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार संवाद के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है। भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि खर्च में कटौती के नाम पर श्रमिकों का शोषण अमानवीय है और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था तथा औद्योगिक व्यवस्था दोनों प्रभावित होंगी।
भारतीय मजदूर संघ ने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप के लिए अपील करते हुए विभिन्न मांगें की है । इन मांगों में त्रिपक्षीय वार्ता जिसमें ओडिशा सरकार, प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच तत्काल उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कराने, छंटनी किए गए सभी श्रमिकों की तत्काल बहाली, सामाजिक सुरक्षा: वैधानिक वेतन के साथ ईपीएफ और ईएसआई जैसे लाभ सुनिश्चित करना शामिल है । इसके साथ साथ पारदर्शी श्रम नीति लाया जाए और स्थानीय कुशली युवाओं को प्राथमिकता देने वाली नीति का कार्यान्वयन तथा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का नौकरी सुरक्षा, वेतन सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर स्पष्ट नीति बनाये जाने की मांग की है ।
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