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ओडिशा थर्मल पावर नीति में बड़ा बदलाव

  •           निवेश आकर्षित करने के लिए नियम हुए आसान

  •           राज्य सरकार ने बिजली खरीद हिस्सेदारी घटाकर 5 प्रतिशत की

  •           आईपीपी के लिए एमओयू प्रक्रिया भी सरल

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने बिजली क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और परियोजनाओं को अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से ओडिशा थर्मल पावर नीति-2008 में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

ऊर्जा विभाग द्वारा अधिसूचित इन संशोधनों का उद्देश्य नीति को निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाना है, जबकि पर्यावरणीय मानकों के पालन को भी सख्ती से सुनिश्चित किया जाएगा।

संशोधित नीति के तहत भविष्य के स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) प्रक्रिया को सरल किया गया है। संबंधित प्रावधान के शीर्षक से “प्रस्तावित” शब्द हटाकर इसे अब केवल “भविष्य के आईपीपी के साथ एमओयू” कर दिया गया है। इससे नई परियोजनाओं के लिए प्रक्रियागत जटिलताएं कम होने की उम्मीद है।

राज्य की बिजली खरीद हिस्सेदारी में बड़ी कटौती

सरकार ने थर्मल पावर परियोजनाओं से बिजली खरीदने के अपने अधिकार को भी कम कर दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार राज्य की नामित एजेंसी अब केवल 5 प्रतिशत बिजली परिवर्तनीय लागत पर खरीद सकेगी, जबकि पहले यह हिस्सा 14 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के स्तर पर था।

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर होगी और ओडिशा थर्मल पावर निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी राज्य बन सकेगा।

पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य

संशोधित नीति में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। सभी स्वतंत्र बिजली उत्पादकों को सरकार और वैधानिक संस्थाओं द्वारा जारी पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। साथ ही परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी उपाय लागू करना अनिवार्य रहेगा।

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