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पारादीप पेट्रोकेमिकल हब को मिलेगा ऊर्जा बल

  •           854 करोड़ की ग्रिड परियोजना को मंजूरी

  •           ओडिशा कैबिनेट ने एरसामा ग्रिड सब-स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को दी स्वीकृति

  •           उद्योगों को मिलेगी उच्च क्षमता वाली बिजली आपूर्ति

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को पारादीप (एरसामा) में 400/220/33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन और उससे जुड़ी ट्रांसमिशन लाइनों की संशोधित लागत 854.24 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी।

यह परियोजना वर्ष 2020-21 में 637.45 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत हुई थी, लेकिन पर्यावरणीय और भौगोलिक चुनौतियों के साथ तकनीकी मानकों में बदलाव के कारण इसकी लागत बढ़ गई। अब राज्य सरकार ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओपीटीसीएल) में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी 191.235 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 256.272 करोड़ रुपये करेगी। अतिरिक्त लगभग 65 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी, जबकि शेष राशि ओपीटीसीएल ऋण के माध्यम से जुटाएगा।

पारादीप और केंद्रापड़ा के उद्योगों को मिलेगा लाभ

यह अत्याधुनिक ग्रिड परियोजना पारादीप और केंद्रापड़ा में विकसित हो रहे पीसीपीआईआर क्षेत्र की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा यह राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी मजबूत करेगी और 400 केवी तथा 220 केवी की मजबूत रिंग नेटवर्क व्यवस्था तैयार करेगी।

इससे राजधानी क्षेत्र का संपर्क पारादीप और कलिंगनगर (डुबुरी) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा। परियोजना के जरिए उच्च क्षमता वाली निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी और ट्रांसमिशन हानि में भी कमी आएगी।

2026-27 तक पूरा होगा काम

संशोधित समयसीमा के अनुसार परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा किया जाएगा। इस दौरान नवीनतम पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और उन्नत तकनीकी उपकरणों को शामिल किया जाएगा ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। परियोजना के चालू होने के बाद एरसामा ग्रिड सब-स्टेशन को ओडिशा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। इससे पूर्वी भारत के सबसे बड़े पेट्रोलियम एवं रसायन निवेश क्षेत्रों में शामिल पीसीपीआईआर की संभावनाओं को नई गति मिलेगी और निवेशकों को अत्याधुनिक बिजली अवसंरचना का भरोसा मिलेगा। इस मंजूरी के साथ ओडिशा ने ऊर्जा अधिशेष और उद्योग-अनुकूल राज्य बनने की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है।

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