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1982 का पुराना कानून होगा खत्म
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नई समुद्री मत्स्य विधेयक-2026 को कैबिनेट की मंजूरी
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मछुआरों की सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और 25 हजार करोड़ के समुद्री निर्यात लक्ष्य पर फोकस
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने समुद्री मत्स्य क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार दशक पुराने ओडिशा समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1982 को समाप्त करने और उसकी जगह ओडिशा समुद्री मत्स्य (निषेध एवं विनियमन) विधेयक, 2026 लागू करने को मंजूरी दे दी है।
मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग ने नए कानून को आधुनिक, मजबूत और समावेशी कानूनी ढांचा बताया है, जो समुद्री संसाधनों के संरक्षण, मछुआरों की सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण जैसी वर्तमान चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगा।
गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और आधुनिक ढांचे को बढ़ावा
सरकार के अनुसार 1982 का पुराना कानून सीमित दायरे का था और बदलती जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था। नया विधेयक गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को विनियमित करेगा तथा समुद्री केज कल्चर, समुद्री शैवाल खेती और कृत्रिम रीफ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देगा, ताकि समुद्री संसाधनों का पुनर्जीवन हो सके।
इसके साथ ही ओडिशा तट पर मछली पकड़ने के बंदरगाहों और फिश लैंडिंग सेंटरों के आधुनिकीकरण सहित स्मार्ट और हरित अवसंरचना विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
मछुआरों की सुरक्षा पर विशेष जोर
नए कानून में तटीय समुदायों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत सभी मछली पकड़ने वाली नौकाओं में ट्रांसपोंडर, वीएचएफ रेडियो और वेसल ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम (वीटीएमएस) जैसे आधुनिक उपकरण अनिवार्य किए जाएंगे।
मछुआरों को मिलेंगे कई लाभ
मछुआरों को बायोमेट्रिक और क्यूआर कोड आधारित आधार पहचान सुविधा तथा बेहतर बीमा कवरेज का लाभ भी मिलेगा। इससे न केवल मछुआरों की व्यक्तिगत सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि तटीय निगरानी व्यवस्था भी सशक्त बनेगी।
अवैध मछली पकड़ने पर सख्ती
नए कानून में अवैध, अनियंत्रित और बिना रिपोर्ट वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों (IUU Fishing) पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसमें नौकाओं और उपकरणों के पंजीकरण, लाइसेंसिंग तथा विनाशकारी मत्स्य गतिविधियों पर प्रतिबंध का प्रावधान शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे पारंपरिक मछुआरों के हित सुरक्षित रहेंगे और समुद्री संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
2036 तक 25 हजार करोड़ के समुद्री निर्यात का लक्ष्य
यह विधेयक विकसित ओडिशा विजन 2036-2047 और राज्य की ब्लू इकोनॉमी रणनीति के अनुरूप तैयार किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बड़े पैमाने पर रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा होंगे। राज्य ने वर्ष 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों के अनुसार नया कानून ओडिशा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री खाद्य बाजार में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह कानून समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षण, मछुआरों की सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ओडिशा की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
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