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कैबिनेट ने नई पुरातत्व क्यूरेटर सेवा नियमावली-2026 को भी दी स्वीकृति
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मंदिरों और स्मारकों के संरक्षण को मिलेगी मजबूती
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अलग पुरातत्व निदेशालय (डायरेक्टोरेट ऑफ आर्कियोलॉजी) के गठन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही प्राचीन मंदिरों, स्मारकों और पुरातात्विक धरोहरों के पेशेवर प्रबंधन के लिए नई सेवा संरचना भी तैयार की गई है। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को समर्पित पुरातत्व निदेशालय की स्थापना को अंतिम स्वीकृति प्रदान की। सरकार का मानना है कि इससे ओडिशा की समृद्ध पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और व्यवस्थित प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी।
यह निर्णय 19 अक्टूबर 2023 को लिए गए उस कैबिनेट फैसले को लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसमें मौजूदा पुरातात्विक क्यूरेटर सेवा के पुनर्गठन और व्यापक सेवा नियमावली तैयार करने का निर्णय लिया गया था।
मंदिरों और स्मारकों के संरक्षण पर विशेष फोकस
नया निदेशालय राज्यभर में फैले प्राचीन मंदिरों, स्मारकों और अन्य पुरातात्विक स्थलों के बेहतर संरक्षण, रखरखाव और प्रबंधन का कार्य करेगा। अधिकारियों के अनुसार इससे पुरातत्व अनुसंधान गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा और ओडिशा की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान मिल सकेगी।
नई सेवा नियमावली को भी मंजूरी
सुधार प्रक्रिया के तहत सरकार ने “ओडिशा आर्कियोलॉजिकल क्यूरेटर सर्विस (भर्ती प्रक्रिया एवं सेवा शर्तें) नियमावली, 2026” को भी अंतिम रूप दे दिया है। इस नियमावली को सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत, वित्त तथा कानून विभागों की सहमति के साथ ओडिशा लोक सेवा आयोग और मोहन चरण माझी की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। नई व्यवस्था के तहत इस विशेष सेवा में अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस संस्थागत ढांचे के लागू होने से विरासत संरक्षण, पर्यटन विकास और पुरातत्व संबंधी शैक्षणिक अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
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