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कोर्ट मैनेजर नियम और कर्मचारियों की पदोन्नति को मंजूरी
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कानून व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम
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जिला अदालतों के ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए खुला पदोन्नति का रास्ता
भुवनेश्वर। ओडिशा मंत्रिमंडल ने प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए कानून विभाग के तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इनमें सबसे अहम निर्णय वर्ष 1974 से 2025 के बीच बने 358 अप्रासंगिक और पुराने कानूनों को समाप्त करने का है।
सरकार के अनुसार इनमें अधिकांश संशोधन अधिनियम ऐसे हैं, जिनके प्रावधान पहले ही मूल अधिनियमों में शामिल किए जा चुके हैं। वहीं कई अन्य कानून एकबारगी उद्देश्य के लिए बनाए गए थे, जिनकी अब आवश्यकता नहीं रह गई है। इन कानूनों के बने रहने से आम नागरिकों, वकीलों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी।
राज्य विधि आयोग की सिफारिश पर फैसला
ओडिशा राज्य विधि आयोग ने 6 अप्रैल और 30 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इन कानूनों को निरस्त करने की सिफारिश की थी। आयोग ने कहा था कि ये कानून अब या तो अप्रासंगिक हो चुके हैं या पूरी तरह निष्प्रभावी हैं।
राज्य सरकार ने आयोग की सिफारिश स्वीकार करते हुए “ओडिशा रिपीलिंग बिल, 2026” विधानसभा में पेश करने का निर्णय लिया है। विधेयक पारित होने के बाद राज्य की विधिक पुस्तिका का बोझ कम होगा और कानून व्यवस्था अधिक स्पष्ट और सरल बन सकेगी।
हाईकोर्ट और जिला अदालतों में कोर्ट मैनेजर के लिए नए नियम
कैबिनेट ने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से हाईकोर्ट और जिला अदालतों में कोर्ट मैनेजर की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों के लिए व्यापक नियमावली को भी मंजूरी दी है।
यह कदम भारत का सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे अदालतों के प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ेगी और प्रधान जिला न्यायाधीशों को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुचारु रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
ग्रुप-डी कर्मचारियों को जूनियर क्लर्क बनने का अवसर
इसके अलावा “ओडिशा जिला एवं सिविल न्यायालय गैर-न्यायिक कर्मचारी सेवा नियम, 2008” में संशोधन कर ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए जूनियर क्लर्क पद पर पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है।
सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, रिक्त पदों को तेजी से भरा जा सकेगा और न्यायिक सेवाओं की कार्यक्षमता में सुधार होगा। साथ ही आम लोगों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी। इन तीनों फैसलों को राज्य सरकार की कानूनी सुधार, न्यायिक दक्षता और जनहित आधारित प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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