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पुरी श्रीमंदिर प्रशासन की आपत्ति के बाद फिरोजपुर रथयात्रा स्थगित

  •     निर्धारित तिथि से पहले रथयात्रा आयोजन पर एसजेटीए ने जताई नाराजगी

  •     पंजाब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मंदिर समिति ने दी लिखित सहमति

भुवनेश्वर। पंजाब के फिरोजपुर कैंटोनमेंट में 23 मई को प्रस्तावित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) की आपत्ति के बाद स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फिरोजपुर मंदिर समिति ने आयोजन रोकने पर सहमति दे दी।

मामला तब सामने आया जब श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने निर्धारित परंपरागत तिथि से लगभग दो महीने पहले रथयात्रा आयोजित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर-सह-जिलाधिकारी ने श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी को पत्र लिखकर मामले में उठाई गई चिंताओं को स्वीकार किया।

इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने फिरोजपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर समिति के साथ बैठक कर पुरी में परंपरागत समय पर ही रथयात्रा आयोजित किए जाने की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता से अवगत कराया। चर्चा के बाद मंदिर समिति ने कार्यक्रम स्थगित करने पर लिखित सहमति दे दी। इसकी प्रति पुरी मंदिर प्रशासन को भी भेजी गई है।

परंपरा और शास्त्रीय तिथि का पालन जरूरी: एसजेटीए

श्रीमंदिर प्रशासन के अनुसार फिरोजपुर कैंटोनमेंट स्थित एक स्थानीय जगन्नाथ मंदिर 23 मई 2026 को रथयात्रा आयोजित करने की तैयारी कर रहा था, जबकि वर्ष 2026 की आधिकारिक रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होगी।

मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने पंजाब प्रशासन को लिखे पत्र में कहा कि अनधिकृत तिथि पर रथयात्रा आयोजन से देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

एसजेटीए ने स्पष्ट किया कि गजपति महाराजा की स्थायी अध्यक्षता वाली श्रीमंदिर प्रबंध समिति पूर्व में भी देश के विभिन्न हिस्सों में समयपूर्व रथयात्रा आयोजन का विरोध करती रही है। प्रशासन ने पंजाब सरकार से अनुरोध किया कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी अनुष्ठान पुरी स्थित मूल पीठ की परंपराओं और शास्त्रीय विधानों के अनुरूप ही आयोजित किए जाएं।

इस संबंध में एक प्रति पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है ताकि तत्काल समन्वय और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

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