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पूर्वी भारत के कृषि विकास के लिए बनेगा रोडमैप

  •           पूर्वी क्षेत्र कृषि सम्मेलन 2026 में किसानों के कल्याण और मिट्टी संरक्षण पर बनी रणनीति

  •           भुवनेश्वर में पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026 आयोजित

  •           मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री समेत पांच राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग

  •           टिकाऊ खेती, प्राकृतिक कृषि और ‘पूर्वोदय मिशन’ पर हुआ मंथन

भुवनेश्वर। पूर्वी भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026 में एक व्यापक रोडमैप तैयार करने पर मंथन हुआ। किसानों के कल्याण, मिट्टी संरक्षण, टिकाऊ खेती और प्राकृतिक कृषि को केंद्र में रखकर आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में मोहन चरण माझी, शिवराज सिंह चौहान सहित पांच पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में टिकाऊ खेती, पारंपरिक फसलों के पुनर्जीवन और प्रधानमंत्री के “पूर्वोदय मिशन” के तहत पूर्वी भारत के कृषि समन्वय को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई।

रासायनिक खाद कम करने की अपील

शिवराज सिंह चौहान ने ओडिशा में रिकॉर्ड धान खरीद की सराहना करते हुए किसानों को जीवन का वास्तविक प्रदाता बताया। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि मिट्टी की सेहत और खाद्य सुरक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की मांग है।

उन्होंने नकली खाद और कीटनाशकों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए जल्द नया कीटनाशक कानून लाने की घोषणा भी की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

समृद्ध कृषक योजना से 19 लाख किसानों को लाभ

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि “समृद्ध कृषक योजना” के तहत किसानों को धान के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर दी जा रही है, जिससे लगभग 19 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री किसान योजना और प्रधानमंत्री किसान योजना के संयुक्त लाभ के तहत राज्य के 51 लाख से अधिक किसानों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है।

पारंपरिक खाद्य पदार्थों और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ब्लॉक स्तर पर “फॉरगॉटन फूड्स” यानी पारंपरिक खाद्य पदार्थों को पुनर्जीवित करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही जैविक खेती का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओडिशा में उत्पादित जैविक चावल का उपयोग अब जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में भी किया जा रहा है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।

हर उपखंड में कोल्ड स्टोरेज और कृषि उद्योग को प्रोत्साहन

राज्य सरकार की कृषि विकास रूपरेखा के तहत सभी 58 उपखंडों में कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि “मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना” के तहत कृषि आधारित उद्योगों को 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।

इसके अलावा छह जिलों में कॉफी की खेती का विस्तार भी किया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

विलुप्त होती खाद्य फसलों के पुनर्जीवन के लिए विशेष

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर पारंपरिक और विलुप्त होती खाद्य फसलों के पुनर्जीवन के लिए विशेष पहल कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1800 से अधिक किसान उत्पादक संगठन सक्रिय हैं, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में 126 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।

उन्होंने बताया कि कोरापुट और कलाहांडी सहित छह जिलों में एक लाख एकड़ भूमि पर कॉफी बागानों का विकास किया जा रहा है। कोरापुट काफी की वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसके बेहतर ब्रांडिंग और विपणन पर जोर दिया।

पूर्वी भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ये सभी पहल पूर्वी भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी और “पूर्वोदय मिशन” के लक्ष्य को मजबूती देंगी। सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में तकनीक, जैविक उत्पादन, जल संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर भी व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री  कनक वर्धन सिंहदेव,  बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री राम विचार नेताम, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर तथा भागीरथी चौधरी पश्चिम बंगाल के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री अशोक किर्तनिया, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव आतीश चंद्रा तथा केंद्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव मंगीलाल जाट भी मंचासीन थे।

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