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बर्मा सागौन की लकड़ी और तीन क्विंटल पीतल से तैयार हुआ आकर्षक द्वार
पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार हाथी द्वार पर नया पीतल जड़ित लकड़ी का भव्य दरवाजा लगाया जा रहा है। परंपरा और उत्कृष्ट शिल्पकला के सुंदर संगम के रूप में तैयार इस नए द्वार की स्थापना कार्य शुक्रवार शाम से शुरू हो गया।
मेघनाद पाचेरी परिसर के भीतर स्थित हाथी द्वार पर पुराने दरवाजे की जगह यह नया अलंकृत द्वार लगाया जा रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, तीन दिनों में स्थापना कार्य पूरा किया जाएगा और इस दौरान मंदिर की पवित्रता एवं परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
तीन महीने में तैयार हुआ भव्य द्वार
यह दरवाजा बर्मा सागौन की लकड़ी से बनाया गया है और इसमें लगभग तीन क्विंटल चमकदार पीतल का उपयोग किया गया है। इस भव्य द्वार का निर्माण कटक के निकट तारापुर बाराटी गांव में किया गया।
प्रसिद्ध शिल्पकार प्रमोद ओझा और उनकी टीम ने करीब तीन महीने तक मेहनत कर इसे तैयार किया। द्वार की नक्काशी और कलात्मक डिजाइन को लेकर श्रद्धालुओं और मंदिर सेवकों के बीच खास उत्साह देखा जा रहा है।
श्रद्धालु ओड़िया दानदाता ने कराया निर्माण
मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस सुंदर द्वार का निर्माण एक श्रद्धालु ओड़िया परोपकारी द्वारा दान स्वरूप कराया गया है। इसकी लंबाई 13 फीट 6 इंच तथा फ्रेम की चौड़ाई 42 इंच है, जबकि पीछे का पैनल 13 फीट 10 इंच लंबा और 48 इंच चौड़ा है।
जगन्नाथ संस्कृति के लिए गौरव का क्षण
हस्ती द्वार श्रीमंदिर के चार प्रमुख प्रवेश द्वारों में से एक माना जाता है। इस द्वार का उपयोग प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और सेवाओं के लिए किया जाता है। ऐसे में नए भव्य द्वार की स्थापना को जगन्नाथ संस्कृति और मंदिर परंपरा के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
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