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सुबह से ही पूजा-अर्चना में जुटीं विवाहित महिलाएं
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पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा गया पवित्र व्रत
भुवनेश्वर। ओडिशा के सबसे प्रमुख और आस्था से जुड़े पर्वों में शामिल सावित्री व्रत शनिवार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर विवाहित महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर पूजा-अर्चना की।
यह पर्व सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें सावित्री ने अपने साहस, भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज को अपने पति सत्यवान का जीवन लौटाने के लिए विवश कर दिया था। यह कथा नारी शक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।
नए वस्त्र, सिंदूर और पूजा सामग्री से सजे घर-आंगन
सुबह से ही महिलाओं ने स्नान कर नई साड़ियां पहनीं, आलता और सिंदूर से श्रृंगार किया तथा ‘सिला पुआ’ की पूजा की, जिसे देवी सावित्री का प्रतीक माना जाता है। पूजा में चावल, दाल और आम, कटहल, केला तथा अनार जैसे मौसमी फलों का भोग लगाया गया। कई महिलाओं ने 7, 9, 11 और 21 प्रकार के फलों से पूजा संपन्न की।
महिलाओं ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला या फलाहार व्रत रखा और सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया। परिवार के सदस्य भी इस धार्मिक अनुष्ठान में सहयोग करते नजर आए।
बाजारों और मंदिरों में दिखी रौनक
सावित्री व्रत को लेकर राज्यभर के बाजारों में विशेष चहल-पहल देखी गई। पूजा सामग्री, फल और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। मंदिरों में भी विशेष पूजा और सामूहिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
पुरी समुद्र तट पर सुदर्शन पटनायक की आकर्षक बालुका
इधर, प्रसिद्ध बालुका कलाकार सुदर्शन पटनायक ने पुरी समुद्र तट पर सावित्री व्रत को समर्पित भव्य बालुका बनाकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया।
इस कलाकृति में सावित्री-सत्यवान, पवित्र वृक्ष और पारंपरिक ओड़िया आकृतियों को उकेरा गया। रेत कला के माध्यम से वैवाहिक प्रेम, आस्था और नारी समर्पण की भावना को दर्शाया गया।
सुदर्शन पटनायक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शुभकामना संदेश साझा करते हुए लिखा कि इस पावन अवसर पर सभी की श्रद्धा और भक्ति समृद्धि एवं खुशियों से परिपूर्ण हो। उनकी यह कलाकृति और संदेश लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।
ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने सावित्री व्रत मनाया
शनिवार को भुवनेश्वर में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने बड़ी श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ सावित्री व्रत मनाया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी, हाथों में मेहंदी, पैरों में आलता, बालों में फूल और माथे पर सिंदूर लगाए किन्नरों ने बरगद के पेड़ों के नीचे पूजा-पाठ किया और अपने गुरुओं तथा समस्त पुरुष समुदाय की लंबी उम्र और कल्याण के लिए प्रार्थना की। ओडिशा किन्नर अखाड़ा ने राजधानी शहर के पलासपल्ली इलाके में बड़े ही भव्य और उत्साहपूर्ण तरीके से इस उत्सव का आयोजन किया।
मंदिरों में सुबह से लगी रही भीड़
भुवनेश्वर और अन्य जिलों के मंदिरों में, फलों, सिंदूर, चूड़ियों और पूजा की अन्य सामग्रियों से सजी पूजा की थालियाँ लिए महिलाओं को लंबी कतारों में खड़े देखा गया। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि यह त्योहार उनके जीवनसाथी के कल्याण के प्रति प्रेम, समर्पण और आस्था का प्रतीक है।
ओडिशा किन्नर अखाड़ा द्वारा आयोजित उत्सव स्थल पर, भक्तिपूर्ण भजनों, घंटियों की गूंज और पारंपरिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। पूजा के दौरान नारियल, कटहल, ताड़ का फल, केले, अंगूर और लीची जैसे विभिन्न प्रकार के फल चढ़ाए गए। ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने न केवल अपने गुरुओं के लिए, बल्कि पूरे समाज की समृद्धि और दीर्घायु के लिए भी प्रार्थना की।
बरगद के पेड़ों के नीचे भी हुई सावित्री पूजा
इस बीच, बिहारी समुदाय की महिलाओं ने भी बरगद के पेड़ों के नीचे सावित्री व्रत रखा और सिंदूर लगाने की पारंपरिक रस्मों में हिस्सा लिया। सावित्री व्रत को विवाहित हिंदू महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है और इस वर्ष, ट्रांसजेंडर समुदाय की अनूठी भागीदारी ने पूरे राज्य में मनाए जा रहे इस उत्सव को एक विशेष आयाम प्रदान किया।
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