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ओडिशा हस्तशिल्प ड्राफ्ट नीति-2026 में कारीगरों के कल्याण पर विशेष जोर
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विशेषज्ञों और शिल्पियों से मांगे गए सुझाव
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और कारीगरों के कल्याण को केंद्र में रखते हुए ओडिशा हस्तशिल्प ड्राफ्ट नीति-2026 पर उच्चस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला भुवनेश्वर स्थित मेफेयर होटल में आयोजित हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्य के हथकरघा, बुनकरी एवं हस्तशिल्प मंत्री प्रदीप बलसामंत ने कहा कि हस्तशिल्प हमारी संस्कृति की धड़कन और पहचान का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य के कारीगर इस अमूल्य विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं और इसी कारण नई हस्तशिल्प नीति में उनके कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
विकसित ओडिशा 2036 के लक्ष्य से जोड़ी गई नीति
हथकरघा, बुनकरी एवं हस्तशिल्प विभाग की आयुक्त-सह-सचिव गुहा पूनम तपस कुमार ने नीति के प्रारूप की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस नीति को विकसित ओडिशा एट 2036 और ओडिशा विजन दस्तावेज के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि अंतिम नीति को बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों, डिजाइनरों, शिक्षाविदों, निर्यातकों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से स्वयं कारीगरों के सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
बाजार, डिजिटलीकरण और जीआई उत्पादों पर चर्चा
दिनभर चली इस कार्यशाला में हस्तशिल्प क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने बाजार तक आसान पहुंच, मशीन निर्मित उत्पादों से प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की उपलब्धता, आधुनिक डिजाइन के माध्यम से युवाओं को आकर्षित करने, डिजिटल मार्केटिंग, वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने, सहकारी समितियों को मजबूत करने, हस्तशिल्प आधारित औद्योगिकीकरण, जीआई टैग उत्पादों को प्रोत्साहन और स्टार्टअप इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने जैसे मुद्दों पर सुझाव दिए।
कई विशेषज्ञ और पद्मश्री सम्मानित शिल्पी रहे मौजूद
कार्यशाला में हस्तशिल्प निदेशक निबेदिता प्रस्ती, उत्कलिका के प्रबंध निदेशक प्रताप चंद्र होता, पद्मश्री सम्मानित शिल्पी बिनोद महाराणा और प्रभाकर महाराणा समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
इसके अलावा वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ अखिला बिहारी ओता, हरेकृष्ण मिश्र, किशोर कुमार बासा, सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक डॉ रामानुज नारायण, निफ्ट के निदेशक विभावरी कुमार, जिला हस्तशिल्प अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार विजेता कारीगर, निर्यातक और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सरकार का मानना है कि यह कार्यशाला ओडिशा के हस्तशिल्प क्षेत्र को एक मजबूत, टिकाऊ और वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्योग में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत साबित होगी, जिससे राज्य के कारीगरों को आर्थिक और सामाजिक रूप से नई मजबूती मिलेगी।
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