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ट्रिब्यूनल में मौसमी जल प्रवाह के आंकड़ों की हुई समीक्षा
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जल बंटवारे पर फैसला अभी बाकी
भुवनेश्वर। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे महानदी जल विवाद को लेकर महानदी जल विवाद अधिकरण में शनिवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। दोनों राज्यों ने नदी के जल प्रवाह से संबंधित विस्तृत आंकड़े ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत किए।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रिब्यूनल के पूर्व निर्देश के तहत मानसून और गैर-मानसून अवधि में जल प्रवाह के आंकड़ों और मौसमी बदलावों की जानकारी दी गई।
ऊपरी निर्माण को लेकर ओडिशा की चिंता
यह विवाद कई वर्षों से जारी है, जिसमें ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी हिस्सों में बनाए गए बांध और बैराज जैसे निर्माण कार्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित कर रहे हैं। ओडिशा का कहना है कि इन परियोजनाओं के कारण विशेषकर गैर-मानसून (सूखे) महीनों में जल उपलब्धता में भारी कमी आ रही है।
सूखे मौसम में घट रहा जल स्तर
सूत्रों के मुताबिक, सूखे मौसम में पानी की आवक कम होने से ओडिशा के कई हिस्सों में महानदी का जल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे सिंचाई और पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ रहा है।
संवाद के जरिए समाधान की कोशिश
मामला फिलहाल न्यायिक विचाराधीन है, लेकिन ओडिशा सरकार ने आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पहल भी की है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, हालांकि अभी तक जमीनी स्तर पर बैठकें शुरू नहीं हो पाई हैं।
अभी तक नहीं आया अंतिम फैसला
ट्रिब्यूनल में कई दौर की सुनवाई के बावजूद अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। इस मामले का फैसला भविष्य में जल बंटवारे, सिंचाई व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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