-
जीतू मुंडा करेंगे ‘शुद्धि’ अनुष्ठान
-
गांव वालों ने दी सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी
-
रस्म पूरी करने पर ही मिलेगा समाज में स्थान
-
गांव की परंपरा के तहत अनुष्ठान अनिवार्य
भुवनेश्वर। केंदुझर जिले के दियानाली गांव में जीतू मुंडा का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। बहन के कंकाल को बैंक ले जाने की घटना के बाद गांव वालों ने उन्हें पारंपरिक ‘शुद्धि’ अनुष्ठान करने के लिए कहा है। सूत्रों के अनुसार, अगर उन्होंने यह रस्म नहीं निभाई तो उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि समाज में दोबारा स्वीकार किए जाने के लिए जीतू मुंडा को ‘शुद्धि’ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और मेल-जोल से दूर रखा जाएगा। स्थिति को देखते हुए जीतू मुंडा ने गांव की परंपराओं का पालन करने के लिए सहमति दे दी है।
बुधवार को होगा शुद्धि अनुष्ठान
यह अनुष्ठान पहले 3 मई को होना था, लेकिन आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे टाल दिया गया। अब यह कार्यक्रम आगामी बुधवार को दियानाली गांव में आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर सैकड़ों ग्रामीण, रिश्तेदार और समुदाय के लोग शामिल होंगे। परंपरा के अनुसार, अनुष्ठान के बाद सामूहिक भोज का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जीतू मुंडा स्वयं लोगों को भोजन कराएंगे।
भोज के बाद ही मिलेगा सामाजिक स्वीकार्यता
ग्रामीणों के अनुसार, ‘शुद्धि’ के बाद आयोजित भोज इस रस्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो व्यक्ति की समाज में पुनः स्वीकार्यता का प्रतीक माना जाता है।
पहले की घटना से जुड़ा विवाद
यह पूरा विवाद उस घटना के बाद शुरू हुआ, जब जीतू मुंडा ने अपनी बहन के कंकाल को निकालकर बैंक के सामने प्रस्तुत किया था, जिससे यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
परंपराओं और सामाजिक दबाव पर बहस
यह घटना ग्रामीण ओडिशा में अब भी पारंपरिक मान्यताओं और सामाजिक नियमों के प्रभाव को दर्शाती है। आधुनिक बदलावों के बावजूद कई क्षेत्रों में सामाजिक स्वीकार्यता और बहिष्कार का निर्णय आज भी परंपराओं के आधार पर लिया जाता है।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
