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पिंड स्तर पर गड़बड़ियों से 1.6 लाख पीवीटीजी लाभ से बाहर
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मनरेगा में भी रोजगार उपलब्धता बेहद कम
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सीएजी की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर
भुवनेश्वर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने ओडिशा में जनजातीय कल्याण, ग्रामीण रोजगार और पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) का बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी लाभों से दूर है।
ऑडिट में 2019-20 से 2023-24 के बीच लागू पीवीटीजी योजनाओं और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में पाया गया कि राज्य की कुल पीवीटीजी आबादी का 54% यानी लगभग 1.6 लाख लोग किसी भी प्रकार की कल्याणकारी योजना के दायरे में नहीं आए।
सिर्फ 11.26% परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार मिला
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्धता सीमित रही। समीक्षा अवधि में सिर्फ 6.24% से 11.26% परिवारों को ही मांगे गए पूरे 100 दिनों का रोजगार मिल सका।
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विभिन्न विभागों में समन्वय की कमी, लाभार्थियों के चयन में त्रुटियां, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और गैर-कार्यक्षम परिसंपत्तियों के निर्माण ने कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को कम किया है। यह रिपोर्ट उन योजनाओं की समीक्षा का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य पीवीटीजीs के आर्थिक-सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।
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