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ओडिशा की जेलों में व्यवस्थाओं पर सीएजी ने उठाए गंभीर सवाल  

  •     सुरक्षा में खामियां और महिलाओं का खुले में स्नान चिंता का कारण

  •     31 जेलों में क्षमता से अधिक बंदी, स्टाफ की भारी कमी

  •     कई जगह महिलाओं की गोपनीयता तक सुरक्षित नहीं

भुवनेश्वर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट में ओडिशा की जेलों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। राज्य विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, जेलों में भीड़भाड़, सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी, गार्ड स्टाफ की कमी और महिलाओं के लिए उचित स्नानघर न होना जैसे बड़े व्यवस्थित दोष सामने आए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य की 87 में से 31 जेलें क्षमता से अधिक भरी हुई हैं, जिसके कारण कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुसार सोने और दैनिक आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। 15 जेलों की टेस्ट चेकिंग में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा संसाधनों की तैनाती और रखरखाव में खामियां पाई गईं।

स्टाफ की कमी और सुरक्षा व्यवस्था में खतरे

जून 2023 से फरवरी 2024 तक किए गए ऑडिट में पाया गया कि 75 जेलों में गार्ड स्टाफ के 1,680 स्वीकृत पदों में से केवल 1,282 कर्मी ही तैनात थे। इस कमी के कारण 2020 से 2023 के बीच 29 कैदियों के जेल तोड़कर भागने की घटनाएं हुईं।

कई जेलों में सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, मोबाइल जैमर और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे।

सुरक्षा उपकरणों की कमी का नतीजा यह रहा कि विशेष जेल भुवनेश्वर में 2020 से 2023 के बीच हुई 46 तलाशी अभियानों में 74 मोबाइल फोन, 56 सिम कार्ड, एक पेन ड्राइव, 26 खाली शराब की बोतलें और 1.76 किलो गांजा जब्त किया गया। बालेश्वर जिला जेल में भी तलाशी के दौरान दो मोबाइल फोन और 1.19 किलो गांजा मिला। रिपोर्ट ने कहा कि इन बरामदगियों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

महिला बंदियों के लिए खुले में स्नान पर चिंता

सीएजी की रिपोर्ट में स्नान सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। ओडिशा मॉडल जेल मैन्युअल के अनुसार, हर 10 कैदियों पर एक ढका हुआ स्नान क्यूबिकल होना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार 2,203 स्नान क्यूबिकल होने चाहिए थे, जबकि राज्य की जेलों में सिर्फ 916 उपलब्ध पाए गए।

कुछ जेलों में महिला बंदियों को खुले प्लेटफॉर्म (पिंडी) पर स्नान करना पड़ता है, जिससे उनकी सम्मान और गोपनीयता दोनों पर सवाल उठते हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं में भी भारी कमी पाई गई। ब्रह्मपुर जेल के छोटे ऑपरेशन थिएटर, फिजियोथेरेपी यूनिट और चौद्वार सर्कल जेल के मनोचिकित्सा कक्ष को छोड़कर अधिकांश जेलों में कोई भी महत्त्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा मौजूद नहीं मिली।

10 जेलों में 121 मानसिक रूप से बीमार कैदियों को सामान्य कैदियों के साथ ही रखा गया, क्योंकि अलग मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों या सुरक्षित कस्टडी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

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