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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में दावा
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राजस्व अधिशेष बरकरार
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पीएसयू डिविडेंड और बजट प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ियां
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5,000 करोड़ से अधिक डिविडेंड बकाया
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बजट का 19.5% खर्च नहीं हुआ
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कमजोर राजस्व वृद्धि और बढ़ता पुनर्भुगतान दबाव चिंता का विषय
भुवनेश्वर। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नई वित्तीय रिपोर्ट में ओडिशा सरकार को राजस्व वसूली, बजट प्रबंधन और सार्वजनिक उपक्रमों से मिलने वाले डिविडेंड के मामले में गंभीर लापरवाहियों के लिए कठघरे में खड़ा किया गया है। राज्य विधानसभा में पेश 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, लाभ में चल रहे 27 राज्य पीएसयू ने राज्य सरकार की डिविडेंड नीति का उल्लंघन करते हुए 5,146.76 करोड़ का बकाया डिविडेंड जमा नहीं किया। वित्त विभाग ने इन बकाया रकम की मांग तक नहीं उठाई, जो वित्तीय निगरानी और प्रवर्तन में गंभीर कमी को दर्शाता है।
मुनाफा बढ़ा, लेकिन भारी नुकसान ने निगेटिव असर डाला
सीएजी ने बताया कि 2022-23 में 18 एसपीएसयू ने कुल 7,073.21 करोड़ का लाभ कमाया, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है। ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन, ओडिशा हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन और फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन प्रमुख लाभ कमाने वाले उपक्रमों में रहे। आरओई भी बढ़कर 31.19% पहुंच गया। दूसरी ओर, सात एसपीएसयू ने 794.98 करोड़ का घाटा दर्ज किया, जिसमें ग्रीडको अकेले 778.18 करोड़ के घाटे के लिए जिम्मेदार रहा। आठ एसपीएसई के कुल घाटे 9,449.38 करोड़ तक पहुंच गए और चार इकाइयों की नेटवर्थ पूरी तरह नकारात्मक हो गई।
56,157 करोड़ रुपये अव्ययित
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल बजट प्रावधान 2.87 लाख करोड़ के मुकाबले सरकार सिर्फ 2.31 लाख करोड़ ही खर्च कर सकी, जिससे 56,157 करोड़ की भारी बचत अधर में रह गई। सीएजी ने इसका कारण अवास्तविक बजट, जरूरत से अधिक प्रावधान और विभागों की कार्यक्षमता में कमी बताया। कई वर्षों में 386.84 करोड़ का अतिरिक्त व्यय नियमित नहीं किया गया, जो संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है।
76,642 करोड़ की बड़ी पुनर्भुगतान का दबाव
कर्ज के मामले में राज्य की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही और ऋण-जीएसडीपी अनुपात 15.48% पर रहा, लेकिन आने वाले सात वर्षों में 76,642 करोड़ की बड़ी पुनर्भुगतान जिम्मेदारी राज्य पर दबाव बढ़ाएगी।
वित्तीय रिपोर्टिंग और फंड प्रबंधन में भी गंभीर कमियां
वित्तीय रिपोर्टिंग और फंड प्रबंधन में भी गंभीर कमियां सामने आईं। प्रदेश पर 911.97 करोड़ की अवितरित देनदारियां दर्ज रहीं। एसएनएखातों में 2,499.76 करोड़ पड़े रह गए। उपयोग प्रमाणपत्रों की लंबित राशि 16,585.45 करोड़ तक पहुंच गई और एसी/डीसी बिलों के समायोजन में 171% की बढ़ोत्तरी देखी गई। पर्सनल डिपॉजिट खातों में 11,417.84 करोड़ जमा पाए गए, जिनमें से बड़ी रकम वर्ष के अंतिम महीनों में बिना तात्कालिक आवश्यकता के जमा की गई।
राजस्व व्यय अब भी अत्यधिक
रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्व व्यय अब भी अत्यधिक है और कुल राजस्व प्राप्तियों का 87.69% इसमें खर्च होता है। सब्सिडी में 121% की वृद्धि हुई और यह 9,134 करोड़ तक पहुंच गई। पूंजीगत व्यय में सुधार के बावजूद कई मदों को गलत वर्गीकृत कर राजस्व प्रकृति के खर्च को पूंजीगत मद में दिखाया गया।
जीएसडीपी बढ़कर 8.9 लाख करोड़ पहुंचा
आर्थिक मोर्चे पर राज्य ने 11.4% की वृद्धि दर्ज की और जीएसडीपी बढ़कर 8.9 लाख करोड़ पहुंचा। राजस्व अधिशेष 22,651 करोड़, जबकि राजकोषीय घाटा 2.81% पर नियंत्रित रहा। लेकिन सीएजी ने चेतावनी दी कि अपनी कर वसूली की गति बेहद धीमी होने और गैर-कर राजस्व में गिरावट से आने वाले वर्षों में वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि खुद के कर राजस्व का उत्प्लावन कारक मात्र 0.02 पर आ गया, जो गंभीर संकेत है।
राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने की सलाह
सीएजी ने सलाह दी है कि राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने, बजट को यथार्थवादी बनाने, पीएसयू से लंबित डिविडेंड वसूली में तेजी लाने और वित्तीय रिपोर्टिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि ओडिशा की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुरक्षित रहे।
रिपोर्ट में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं
- 911.97 करोड़ रुपये की अवैतनिक देनदारियां (ब्याज, पेंशन अंशदान, सेस)
- 2,499.76 करोड़ रुपये एसएनएखातों में ‘पार्क’
- 16,585.45 करोड़ रुपये की लंबित उपयोग प्रमाणपत्र (यूसी)
- एसी/डी बिलों में 171% वृद्धि
- 11,417.84 करोड़ रुपये व्यक्तिगत जमा खातों में जमा, जिनमें से कई वर्ष के अंतिम दो महीनों में डाले गए
खर्च का पैटर्न
राजस्व खर्च 87.69% तक बढ़ गया। सब्सिडी में 121% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो 9,134 करोड़ रुपये तक पहुंची। पूंजीगत व्यय 45,481 करोड़ रुपये तक पहुंचा, लेकिन 721 करोड़ रुपये के राजस्व खर्च को गलत तरीके से पूंजी खाते में दिखाया गया।
राजस्व मोर्चे पर चिंता गहरी है
- कुल राजस्व केवल 2.43% बढ़ा
- राज्य का अपना कर उत्प्लावन कारक 0.02 तक गिर गया
- कुल राजस्व उत्प्लावन कारक 0.21 तक सीमित
- गैर-कर राजस्व में गिरावट, खासकर पीएसयू डिविडेंड न मिलने से
- सीएजी की प्रमुख सिफारिशें
- राजस्व वसूली में सुधार
- बजट की यथार्थवादी योजना
- एसपीएसयू से समय पर डिविडेंड और बकाया वसूली
- फंड प्रबंधन और खर्च में पारदर्शिता
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