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हथकरघा और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत का भव्य उत्सव
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी स्थित जनता मैदान में शनिवार से 20वां ग्रांड तोशाली स्वदेशी मेले का शुभारंभ हुआ। यह मेला ओडिशा के हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक पहचान और शिल्प कौशल का भव्य प्रदर्शन कर रहा है।
मेला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ओडिशा के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों में अनूठी आकर्षण शक्ति है, जो राज्य की गौरवशाली विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने बताया कि मेले का मुख्य उद्देश्य बुनकरों और कारीगरों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देना है।
बुनकर विरासत के ध्वजवाहक, कारीगर कला के राजदूत
हथकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प मंत्री ने राज्य के बुनकरों और कारीगरों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि बुनकर जहां ओडिशा की बुनाई परंपरा के ध्वजवाहक बने हैं, वहीं हस्तशिल्प कारीगर कला उत्कृष्टता के राजदूत के रूप में उभरे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार उनके आजीविका सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
12 कारीगर सम्मानित, चार महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर
उद्घाटन अवसर पर 12 कारीगरों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। हस्तशिल्प निदेशालय ने सीएसआईआर-आईएमएमटी भुवनेश्वर तथा भारतीय पैकेजिंग संस्थान मुंबई के साथ दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसी प्रकार हथकरघा एवं वस्त्र निदेशालय ने आईसीएआर-राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान और ओडिशा प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय भुवनेश्वर के साथ दो अन्य एमओयू किए। कार्यक्रम में विभाग की आयुक्त-सह-सचिव गुहा पूनम तपस कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जबकि हस्तशिल्प निदेशक डॉ निवेदिता पृष्टि ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर एकाम्र विधायक बाबू सिंह, स्वावलंबी अभियान की क्षेत्रीय समन्वयक शारदा सतपथी, प्रख्यात बांधा कलाकार एवं पद्मश्री सम्मानित शरत कुमार पात्र, अतिरिक्त सचिव प्रताप चंद्र होता तथा हथकरघा एवं वस्त्र निदेशक सूर्य नारायण पटनायक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
20 राज्यों के 905 स्टॉल, देशभर के कारीगरों की भागीदारी
यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा। इस वर्ष कुल 905 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें 20 राज्यों के बुनकर और कारीगर भाग ले रहे हैं। तोशाली स्वदेशी मेला न केवल ओडिशा की कला और शिल्प परंपरा का उत्सव है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का सशक्त मंच भी है।
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