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भुवनेश्वर में जाइका असिस्टेड फॉरेस्ट्री प्रोजेक्ट्स पर 14वीं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ
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मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने किया उद्घाटन
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आज जाइका असिस्टेड फॉरेस्ट्री प्रोजेक्ट्स (जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी) की 14वीं राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। होटल मेफेयर कन्वेंशन में आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यशाला 11 से 13 फरवरी तक चलेगी।
इस वर्ष कार्यशाला का विषय है-भविष्य के लिए तैयार वानिकी : जलवायु सहनशीलता, डिजिटल रूपांतरण एवं सतत लकड़ी अर्थव्यवस्था, जो देश के वानिकी क्षेत्र में तकनीक और स्थिरता के समन्वय पर केंद्रित है। इसका संयुक्त आयोजन ओडिशा फॉरेस्ट्री सेक्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (ओएफएसडीपी) चरण-द्वितीय और जिका द्वारा किया गया है।
स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु संकट का समाधान
कार्यक्रम का उद्घाटन ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक जलवायु संकट से निपटने, पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और लाखों लोगों की आजीविका को संरक्षित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने जापान सरकार और जिका के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस साझेदारी ने भारत की प्राकृतिक धरोहर और विशेषकर आदिवासी, अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा में अहम योगदान दिया है।
ओएफएसडीपी चरण-तीन की संभावनाओं पर भी जोर
मंत्री सिंहखुंटिया ने बताया कि ओएफएसडीपी चरण-द्वितीय मार्च 2027 में पूर्ण होने जा रहा है। ऐसे में उन्होंने चरण-तीन के क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई, ताकि ओडिशा “समृद्ध ओडिशा 2036” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि जलवायु सहनशील वानिकी और डिजिटल तकनीकों का समावेश भविष्य की जरूरत है, जिससे वन प्रबंधन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।
डिजिटल परिवर्तन और लचीली वानिकी पर रणनीतिक चर्चा
उद्घाटन सत्र में देश-विदेश के वरिष्ठ नीति-निर्माता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। जिका इंडिया के विकास संचालन प्रमुख श्री विनीत एस. सरिन और वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकामात्सु एइजी ने अपने विचार रखे। इसके अलावा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निरीक्षक जनरल (ईएपी) केबी सिंह, ओडिशा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ के मुरुगेशन तथा अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजना) एवं ओएफएसडीपी के परियोजना निदेशक जी राजेश भी उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय इस कार्यशाला में डिजिटल परिवर्तन, जलवायु अनुकूल वन प्रबंधन और सतत लकड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक विचार-विमर्श किया जाएगा।
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