भुवनेश्वर। ओडिशा के वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार टोल प्लाजा पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र न होने पर लगाए जाने वाले 10,000 रुपये के जुर्माने में कटौती पर विचार कर रही है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं है, बल्कि नियमों का संतुलित और व्यावहारिक तरीके से पालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि फिटनेस प्रमाणपत्र की तरह प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र भी अनिवार्य है, लेकिन इसका प्रवर्तन निष्पक्ष और व्यवहारिक होगा।
जेना ने यह भी स्वीकार किया कि कई लोगों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र करने की प्रक्रिया बोझिल लगती है। उन्होंने कहा कि सभी वाहन स्वामियों के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र के साथ प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र रखना अनिवार्य है। भले ही कार्रवाई अचानक प्रतीत हो, लेकिन वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।
ओडिशा उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि वाहन मालिकों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने से पहले 90 दिनों से अधिक पुराने सभी लंबित चालान का निपटारा करना होगा। न्यायालय ने मोटर वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया है। मंत्री ने दोहराया कि सरकार नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ जनसुविधा का संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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