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वनाग्नि से निपटने के लिए ओडिशा पूरी तरह तैयार, विभागीय तैयारियां अंतिम चरण में

भुवनेश्वर,  राज्य में आगामी वनाग्नि मौसम से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वन विभाग की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।  भुवनेश्वर स्थित ‘अरण्य भवन’ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. के. मुरुगेशन ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस संबंध में जानकारी दी ।

उन्होंने वनाग्नि के प्रभाव, इसके कारणों तथा रोकथाम के लिए विभाग द्वारा अपनाए गए तकनीकी और क्षेत्रीय स्तर के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि वनाग्नि न केवल जंगलों के लिए, बल्कि वन्यजीवों और जंगलों पर निर्भर समुदायों की आजीविका के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष ओडिशा में लगभग 29,709 वनाग्नि घटनाओं की पहचान की गई थी। शुष्क मौसम, जंगलों में सूखी पत्तियों का जमाव और मानवजनित लापरवाही इसके प्रमुख कारण रहे। हालांकि, उपग्रह आधारित अलर्ट प्रणाली और वन कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के चलते लगभग 99.7 प्रतिशत घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया, जिससे नुकसान न्यूनतम रहा। इसी अनुभव के आधार पर चालू वर्ष के लिए राज्य के सभी जिलों हेतु अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। आग के फैलाव को रोकने के लिए करीब 20,461 किलोमीटर लंबी अग्निरोधक रेखाएं (फायर लाइन) तैयार की गई हैं।

इस वर्ष वनाग्नि प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। आग की प्रारंभिक पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही रेंज और बीट स्तर पर 334 विशेष सुरक्षा दल तैनात किए गए हैं, जिन्हें 5,000 से अधिक लीफ ब्लोअर और अन्य अग्निशमन उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए 631 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के लगभग 200 कर्मियों को भी वनाग्नि नियंत्रण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

वन विभाग ने अंत में स्थानीय समुदायों और वनवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सहयोग की अपील की है। वन सुरक्षा समितियों और इको-डेवलपमेंट कमेटियों के माध्यम से लगभग 336 गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विभाग ने लोगों से जंगलों में लापरवाही से आग न लगाने का आग्रह किया है, यह स्पष्ट करते हुए कि आम जनता की सक्रिय भागीदारी के बिना वनों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा संभव नहीं है।प्रेस वार्ता में श्री कार्तिक वी., मुख्य वन संरक्षक (प्लानिंग एवं एसएम), भी उपस्थित रहे।

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