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चक्रवात अर्णव और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन तेज करने का निर्देश

  •     राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

  •     ओडिशा में अब तक 1,65,809 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, 592 राहत शिविर संचालित

  •     बचाव कार्य में 54 ओड्राफ, 9 एनडीआरएफ और 100 से अधिक अग्निशमन दल तैनात

भुवनेश्वर। चक्रवात ‘अर्णव’ के बाद लगातार बारिश और बाढ़ से प्रभावित ओडिशा के गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं की बहाली को गति देने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने मंगलवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, नुकसान के आकलन, मुआवजा वितरण और चक्रवात ‘मुरासु’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचाने, नुकसान का आकलन शीघ्र पूरा करने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

मुरासु का ओडिशा में बड़ा प्रभाव नहीं

मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि चक्रवात ‘मुरासु’ सोमवार देर रात आंध्र प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। फिलहाल यह विजयवाड़ा के दक्षिण में स्थित है और आगे तेलंगाना की दिशा में बढ़ने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि अब तक ओडिशा के किसी भी जिले में इस चक्रवात का कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन लगभग 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पुरी में सर्वाधिक 12 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि मालकानगिरि, कोरापुट और गंजाम जिलों में 10 मिलीमीटर या उससे कम वर्षा दर्ज की गई।

छह जिलों से 1.65 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया

राज्य सरकार के अनुसार, संभावित खतरे को देखते हुए छह जिलों से अब तक कुल 1,65,809 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें गंजाम से 1,52,010, गजपति से 620, मालकानगिरि से 5,073, कोरापुट से 1,101, कंधमाल से 6,269 और रायगड़ा से 736 लोग शामिल हैं।

प्रभावित जिलों में कुल 592 स्थायी एवं अस्थायी राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए 54 ओड्राफ टीम, 9 एनडीआरएफ टीम और 100 से अधिक अग्निशमन दल तैनात किए गए हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

प्रभावित जिलों में अधिकांश स्कूल फिलहाल बंद हैं। स्कूल दोबारा खोलने का निर्णय संबंधित जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद लेगा।

चार आईएएस अधिकारियों को अतिरिक्त विशेष राहत आयुक्त की जिम्मेदारी

नुकसान के आकलन, मुआवजा वितरण और बुनियादी सुविधाओं की बहाली में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने चार आईएएस अधिकारियों को पूर्ण अधिकारों के साथ अतिरिक्त विशेष राहत आयुक्त (अतिरिक्त एसआरसी) के रूप में तैनात किया है।

इन अधिकारियों की तैनाती इस प्रकार की गई है।

गजपति : पवन कुमार, आईएएस (2024 बैच)।

गंजाम : अजीत कुमार, आईएएस (2022 बैच) और तेजस्विनी बेहरा, आईएएस (2023 बैच)।

कंधमाल : शिव मालवीय, आईएएस (2023 बैच)।

इन अधिकारियों को संबंधित जिलों में प्रशासनिक समन्वय मजबूत करने, नुकसान का आकलन कराने, प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और पुनर्बहाली कार्यों में तेजी लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री ने पहले ही घोषित किया है मुआवजा पैकेज

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात ‘अर्णव’ से मकानों, कृषि भूमि और व्यवसायों को हुए नुकसान के लिए मुआवजा पैकेज की घोषणा पहले ही कर दी है।

पंचायती राज, ग्रामीण विकास, निर्माण, ऊर्जा और जल संसाधन विभागों की ओर से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पुनर्बहाली का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को घोषित सहायता के साथ-साथ बिजली, पानी, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं।

सरकार ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया

राज्य सरकार ने आश्वस्त किया है कि आपदा प्रभावित लोगों को राहत, मुआवजा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं।

बैठक में मुख्य सचिव अनु गर्ग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल, अग्निशमन सेवा महानिदेशक डॉ सुधांशु षाड़ंगी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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