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हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी में गोवर्धन पीठ के अभियान और सनातन परंपरा के संरक्षण पर दिया जोर
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सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और संगोष्ठियों के माध्यम से समाज को जोड़ने का आह्वान
पुरी। हिंदू राष्ट्र की अवधारणा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को लेकर आयोजित हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी में गोवर्धन पीठ, पुरी के शंकराचार्य के शिष्य एवं अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने लोगों से सनातन परंपराओं के प्रति जागरूक और सक्रिय होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ सनातन ध्वज भी लगाया जाना चाहिए। संगोष्ठी में उन्होंने गोवर्धन पीठ की ओर से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी देते हुए सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और संगोष्ठियों के माध्यम से समाज को एकजुट करने तथा सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।
यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित एमएलके कॉलेज में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसमें अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने सनातन धर्म के मानबिंदुओं की रक्षा और धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना के प्रसार के लिए गोवर्धन मठ, पुरी की ओर से संचालित अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है।
इसी दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने लोगों से अपने-अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ सनातन ध्वज लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के प्रति जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए घर-घर तक इस अभियान को पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और संगोष्ठियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। उनका कहना था कि समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का विस्तार संगठित प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के अपने विचार और लक्ष्य को भी संगोष्ठी में रखा।
सुशिक्षित, सुरक्षित और संस्कारित समाज से बनेगा भव्य भारत
अपने संबोधन में प्रेमचंद्र झा ने कहा कि भव्य भारत के निर्माण के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुशिक्षित, सुरक्षित, सुसंस्कृत, सेवापरायण और स्वस्थ व्यक्ति एवं समाज की संरचना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सेवा भावना, संस्कार, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को जीवन का हिस्सा बनाकर ही एक सशक्त एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत का निर्माण किया जा सकता है। संगोष्ठी में सनातन परंपरा के संरक्षण और समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर प्रोफेसर प्रकाश मिश्र, कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर डॉक्टर सुनील कुमार शुक्ल, प्रोफेसर मिसेज सिंह एवं अन्य ने भी अपने विचार रखें।
शांति प्रभु मिश्र, पंडित वीरेंद्र मिश्र, केके त्रिपाठी, राजू पांडेय, प्रदीप गुप्ता, राजेश मिश्र, महाविद्यालय के छात्र एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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