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चक्रवात ‘मुरासु’ को लेकर मालकानगिरि में हाई अलर्ट

  •     बालिमेला जलाशय के खोले गए गेट

  •    4 नवंबर तक स्कूल-कॉलेज

  •     आंगनबाड़ी केंद्र और शराब दुकानें बंद

  •     संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश

  •     गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने पर जोर

  •     24 घंटे सक्रिय जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष

मालकानगिरि। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात ‘मुरासु’ के प्रभाव की आशंका को देखते हुए ओडिशा के मालकानगिरि जिला प्रशासन ने व्यापक आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में जनहानि को शून्य रखना है। जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी प्रथमेश अरविंद ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर विभिन्न विभागों को सतर्क रहने और आवश्यक कदम तत्काल उठाने के निर्देश दिए हैं।

जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी एवं निजी स्कूलों और कॉलेजों को आज से 4 नवंबर 2026 तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। इन शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग अस्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों के रूप में किया जाएगा। संबंधित कर्मचारियों को आपातकालीन ड्यूटी पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। इसी अवधि में जिले की सभी शराब दुकानें भी बंद रहेंगी।

पहाड़ी, भूस्खलन संभावित और निचले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रखंड विकास अधिकारियों, तहसीलदारों, पंचायत कार्यकारी अधिकारियों और राजस्व निरीक्षकों को तैनात किया गया है। बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 15 दिनों में प्रसव की संभावित तिथि वाली गर्भवती महिलाओं को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला मुख्यालय अस्पताल में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए प्रखंडवार एंबुलेंस मार्ग और आपातकालीन परिवहन की योजना तैयार की गई है।

संभावित जलभराव और बाढ़ को देखते हुए संवेदनशील सड़कों, निचले पुलों और अन्य जोखिम वाले मार्गों पर यातायात नियंत्रण एवं मार्ग परिवर्तन की व्यवस्था की जाएगी। पोटेरू और कांगुरकोंडा जैसे बाढ़ संभावित पुलों के आसपास जलस्तर निर्धारित सीमा से ऊपर पहुंचने पर बैरिकेडिंग लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

आश्रय स्थलों पर रोशनी, भूस्खलन वाले क्षेत्रों में मशीनें तैनात

सड़क एवं भवन विभाग के अभियंताओं को चक्रवात आश्रय स्थलों पर हैलोजन और टावर लाइट की व्यवस्था पहले से करने को कहा गया है। भूस्खलन संभावित मार्गों पर जेसीबी और उत्खनन मशीनें तैनात रहेंगी, ताकि पेड़ गिरने या मलबा जमा होने से सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल रास्ता साफ किया जा सके।

सातिगुड़ा, चित्रकोंडा सहित जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर नौका विहार, जलक्रीड़ा और अन्य जल आधारित गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अस्पतालों, पेयजल केंद्रों और नियंत्रण कक्षों में जल्द से जल्द बिजली बहाल करने के लिए टीपीएसओडीएल की विशेष टीमें तैनात की गई हैं।

बालिमेला जलाशय के एक रेडियल और दो स्लुइस गेट खोले गए

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद चित्रकोंडा स्थित बालिमेला जलाशय में जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए उसके गेट खोले गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जलाशय का अधिकतम जल संग्रहण स्तर 1,516 फुट है, जबकि जलस्तर 1,510.80 फुट तक पहुंच गया था। इसके बाद शाम 4 बजकर 50 मिनट पर एक रेडियल गेट और दो स्लुइस गेट खोले गए।

गेट खोलने से पहले दोपहर 2 बजे ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया था। फिलहाल जलाशय से प्रति सेकंड 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पोटेरू सिंचाई परियोजना के मुख्य निर्माण अभियंता तृप्त कुमार पात्र ने बताया कि वर्षा की तीव्रता और जलाशय में पानी के प्रवाह को देखते हुए आगे अतिरिक्त गेट खोलने का निर्णय लिया जाएगा।

किसानों और पशुपालकों को भी सतर्क रहने की सलाह

पशुपालन विभाग को मवेशियों के लिए सुरक्षित आश्रय, चारा और चलित पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। मत्स्य विभाग ने मछुआरों को सभी जलाशयों, नदियों और जल क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। किसानों को ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से पकी हुई फसल और सब्जियों की जल्द कटाई करने की सलाह दी जा रही है, ताकि संभावित बारिश और तेज हवा से नुकसान कम किया जा सके।

24 घंटे सक्रिय रहेगा आपातकालीन नियंत्रण कक्ष

जिला प्रशासन ने 24 घंटे सक्रिय जिला आपातकालीन संचालन केंद्र स्थापित किया है। किसी भी आपात स्थिति, सहायता या जानकारी के लिए आम नागरिक इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष : 06861-231372

टोल फ्री हेल्पलाइन : 1077

प्रशासन ने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को जारी निर्देशों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पालन करने को कहा है। चक्रवात के संभावित प्रभाव से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, आवश्यक सेवाएं चालू रखने और राहत-बचाव व्यवस्था को तैयार रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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