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गंजाम तट के 27 हजार मछुआरे बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर
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बार-बार मछली पकड़ने पर प्रतिबंध से आर्थिक संकट गहराया
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सितंबर से अब तक 20 दिन भी समुद्र में नहीं जा सके कई मछुआरे
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कर्ज लेकर परिवार चला रहे मछुआरे
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महिलाओं को भी मजदूरी करने की नौबत
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सरकार से आर्थिक सहायता की मांग
ब्रह्मपुर। चक्रवात ‘अर्णव’ और उसके बाद आई बाढ़ के कारण गंजाम जिले के मछुआरों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्राकृतिक आपदाओं के चलते बार-बार समुद्र और नदियों में मछली पकड़ने पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों ने हजारों मछुआरों को बेरोजगारी और आर्थिक तंगी की ओर धकेल दिया है। जिले के करीब 27 हजार मछुआरे इस समस्या से प्रभावित हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान काम के नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।
गंजाम ब्लॉक के पदमपेटा निवासी एक मछुआरे ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि पिछले साल सितंबर से अब तक वे 20 दिनों से अधिक समय तक मछली पकड़ने के लिए समुद्र में नहीं जा सके हैं। लगातार प्रतिबंधों के कारण उनकी आय का स्रोत लगभग समाप्त हो गया है।
उन्होंने बताया कि परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। समुद्र में जाने और मछली पकड़कर लौटने के बाद मछलियां बेचकर उस कर्ज को चुकाया जाता है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कुछ महिलाओं को भी घर चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ रही है।
27 हजार मछुआरों की आजीविका प्रभावित
आर्यपल्ली के समुद्री मछुआरे के एलैया ने मीडिया को दिए गए बयान में बताया कि बंगाल की खाड़ी में गहरे अवदाब की स्थिति बनने के बाद 23 सितंबर 2026 को मछुआरों को समुद्र में जाने से सख्ती से रोक दिया गया था। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समुद्र और नदियों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है, लेकिन इस अवधि में मछुआरों की आजीविका के नुकसान की भरपाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। केवल आर्यपल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लगभग 27 हजार मछुआरे अपनी आजीविका खोने की स्थिति में हैं।
मत्स्य विभाग के पास विशेष सहायता नीति नहीं
मछुआरा नेता एम गुमाली ने कहा कि मत्स्य विभाग के पास ऐसी परिस्थितियों में मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए कोई विशेष नीति नहीं है। उनका कहना है कि समुद्र में जाकर मछली पकड़ने पर ही परिवार का जीवन चलता है। यदि समुद्र में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है तो परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मछुआरों की वास्तविक परेशानी को समझने वाला कोई नहीं है।
गुमाली के अनुसार, सितंबर से अब तक 15 दिनों से अधिक समय तक मछली पकड़ने की गतिविधियां बाधित रही हैं। चक्रवात और बाढ़ से होने वाले नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के कारण आजीविका के नुकसान के लिए मछुआरों को कोई सहायता नहीं मिलती।
चार ब्लॉकों में मछुआरों के सामने गंभीर संकट
गंजाम, छत्रपुर, रंगेईलुंडा और चिकिटी ब्लॉक के मछुआरे भी इसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं। बार-बार समुद्र में जाने पर रोक लगने के कारण अनेक परिवारों के पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं बचा है। मछुआरों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षा के लिए प्रतिबंध जरूरी हैं, लेकिन प्रतिबंध की अवधि में उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए।
आर्थिक सहायता देने को विशेष नीति की मांग
अब मछुआरे सरकार से मांग कर रहे हैं कि समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान उन्हें आर्थिक सहायता देने के लिए विशेष नीति बनाई जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी आजीविका पूरी तरह संकट में न पड़े।
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