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मन की बात में मैथिली भुए की कहानी का उल्लेख किया
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कभी जंगल से जलावन, महुआ फूल और तेंदुपत्ते एकत्र कर चलाती थीं परिवार
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सामुदायिक पर्यावरण अनुकूल पर्यटन पहल से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया
भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ओडिशा के डेब्रीगढ़ क्षेत्र की महिलाओं के वन संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल आजीविका के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ढोड्रोकुसुम गांव की मैथिली भुए की प्रेरक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने वाली एक महिला आज सामुदायिक पर्यटन और वन संरक्षण की मुहिम का नेतृत्व कर रही है।
मैथिली कभी जंगल से जलावन, महुआ फूल और केंदू पत्ते एकत्र कर परिवार चलाती थीं। वर्ष 2023 में डेब्रीगढ़ की सामुदायिक पर्यावरण अनुकूल पर्यटन पहल से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने 100 लोगों की क्षमता वाले जीरो प्वाइंट रेस्तरां का संचालन संभाला और करीब 9,500 रुपये की मासिक आय अर्जित करने लगीं। इससे उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार के इलाज में मदद मिली।
शुरुआत में सामाजिक विरोध और आलोचना का सामना
शुरुआत में सामाजिक विरोध और आलोचना का सामना करने के बावजूद मैथिली ने अपना प्रयास जारी रखा। बाद में उनके काम को सम्मान मिला और उन्हें सर्वसम्मति से ढोड्रोकुसुम पर्यावरण विकास समिति का अध्यक्ष चुना गया। उनके नेतृत्व से क्षेत्र की 40 से अधिक महिलाओं ने पेड़ों की कटाई छोड़कर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी आय गतिविधियों को अपनाया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार, करीब 60 महिलाएं अब इसी तरह आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मैथिली की यात्रा एक उदाहरण – मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैथिली की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सामुदायिक भागीदारी के जरिए जंगलों की रक्षा के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका भी विकसित की जा सकती है। उनके प्रयासों से महिलाओं को पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, होमस्टे संचालन, वन्यजीव संरक्षण और घासभूमि पुनर्स्थापना जैसे कार्यों से जोड़ने में मदद मिली है।
ग्रामीण जीवनशैली में भी बदलाव लाने का प्रयास किया
मैथिली ने पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण जीवनशैली में भी बदलाव लाने का प्रयास किया है। उनके नेतृत्व में एलपीजी और ईंधन दक्ष चूल्हों के उपयोग, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण कानूनों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। डेब्रीगढ़ क्षेत्र की यह पहल अब महिला नेतृत्व वाले वन संरक्षण और टिकाऊ पर्यटन के उदाहरण के रूप में सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री माझी ने प्रधानमंत्री का जताया आभार
इधर, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को नयापल्ली स्थित श्री बालुंकेश्वर महादेव पीठ परिसर में आयोजित ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण को सुना। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि इस बार ओडिशा को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान मिला। प्रधानमंत्री ने राज्य के इतिहास, प्राकृतिक संपदा, कला-संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव लाने वाले ओडिया लोगों के प्रयासों को देश के सामने रखा।
ओडिशा को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा को राष्ट्रीय मंच पर मिली यह पहचान राज्य के लोगों को राष्ट्र निर्माण में और अधिक योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि ‘मन की बात’ राष्ट्र निर्माण और युवा शक्ति के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है।
ओडिशा के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख
कार्यक्रम में ओडिशा के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख हुआ। मुंबई के एक श्रोता कृष्ण शेषाद्रि ने प्रधानमंत्री के समक्ष ओडिशा के प्रसिद्ध भौमकर वंश की रानी त्रिभुवन महादेवी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों से संवाद करने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि इस तरह की चर्चा से ओडिशा का गौरवशाली इतिहास राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सामने आया है।
विकास और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में अनेक युवा और ग्रामीण नागरिक चुनौतियों का सामना करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनकी कहानियां अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर सामने नहीं आ पातीं। प्रधानमंत्री द्वारा ऐसे लोगों के संघर्ष, समर्पण और सफलता को देश के सामने लाने से समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा पैदा होती है।
मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान करते हुए नागरिकों से विकास और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ने की अपील की।
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