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गर्म समुद्री पानी, कम वायुदाब और तेज हवाओं के मेल से विकसित होता है यह
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अक्टूबर में बंगाल की खाड़ी में बढ़ जाती है आशंका
हेमन्त कुमार तिवारी, भुवनेश्वर।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान की आशंका के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर समुद्र के ऊपर चक्रवात बनता कैसे है और कुछ ही दिनों में यह इतना शक्तिशाली कैसे हो जाता है? चक्रवात अचानक पैदा होने वाली घटना नहीं है, बल्कि समुद्र के तापमान, वातावरण में नमी, वायुदाब और हवाओं की दिशा के बीच होने वाली जटिल प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम है। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर समुद्र के ऊपर विकसित हुआ निम्न दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे विनाशकारी तूफान का रूप ले सकता है।
गर्म समुद्र से मिलती है चक्रवात को ऊर्जा
चक्रवात के निर्माण में समुद्र की सतह का गर्म होना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्यतः समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर चक्रवात के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, केवल गर्म पानी होना पर्याप्त नहीं है। वातावरण में पर्याप्त नमी और हवाओं की अनुकूल स्थिति भी जरूरी होती है।
गर्म समुद्र से पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है। नम हवा ऊपर जाकर ठंडी होती है और उसमें मौजूद जलवाष्प संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है। इस प्रक्रिया में ऊष्मा निकलती है, जिससे हवा को ऊपर उठने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, तो मौसम प्रणाली मजबूत होने लगती है।
निम्न वायुदाब से शुरू होता है चक्रवात का विकास
समुद्र के ऊपर गर्म और नम हवा के लगातार ऊपर उठने से सतह के पास वायुदाब कम होने लगता है। आसपास के क्षेत्रों की हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर बढ़ती है। पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव से हवा की दिशा मुड़ती है और अनुकूल परिस्थितियों में एक घूमती हुई वायुमंडलीय प्रणाली विकसित होने लगती है।
इस दौरान बादलों का विस्तार होता है, बारिश तेज होती है और हवाओं की गति बढ़ने लगती है। यदि समुद्र से लगातार ऊर्जा मिलती रहे तथा वातावरण में हवा की दिशा और गति अनुकूल बनी रहे, तो यह प्रणाली धीरे-धीरे शक्तिशाली चक्रवात में बदल सकती है।
निम्न दबाव से चक्रवाती तूफान तक का सफर
चक्रवात बनने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है। सबसे पहले समुद्र के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है। अच्छी चरह से चिह्नित होने के बाद यह मजबूत होता है और फिर वह डिप्रेशन और उसके बाद डीप डिप्रेशन में बदलता है। इसके बाद हवा की गति निर्धारित सीमा तक पहुंचने पर मौसम विभाग उसे चक्रवाती तूफान घोषित करता है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहने पर इसकी तीव्रता और बढ़ सकती है।
हर निम्न दबाव का क्षेत्र चक्रवात में नहीं बदलता
हालांकि, हर निम्न दबाव का क्षेत्र चक्रवात में नहीं बदलता। समुद्र से पर्याप्त ऊर्जा न मिलने, वातावरण में नमी की कमी या ऊंचाई के साथ हवाओं की गति और दिशा में अधिक अंतर होने पर इसका विकास रुक भी सकता है।
अक्टूबर में बंगाल की खाड़ी में क्यों बढ़ता है चक्रवात का खतरा?
अक्टूबर का महीना बंगाल की खाड़ी में चक्रवात के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के आसपास समुद्र की गर्मी, वातावरण में नमी और हवाओं की अनुकूल परिस्थितियां कई बार चक्रवाती प्रणालियों के विकास में मदद करती हैं।
ओडिशा की लंबी तटरेखा बंगाल की खाड़ी से लगी होने के कारण राज्य को ऐसे तूफानों का खतरा रहता है। हालांकि, चक्रवात का बनना, उसकी तीव्रता और वह किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह कई मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए हर चक्रवात का मार्ग और प्रभाव अलग हो सकता है।
समुद्र से जमीन पर पहुंचते ही कमजोर क्यों होने लगता है तूफान?
समुद्र के ऊपर चक्रवात को गर्म पानी और नमी से लगातार ऊर्जा मिलती रहती है। तट से जमीन पर पहुंचने के बाद यह ऊर्जा स्रोत काफी हद तक समाप्त हो जाता है। साथ ही, जमीन की सतह से होने वाला घर्षण हवाओं के संगठित प्रवाह को प्रभावित करता है। इससे चक्रवात सामान्यतः धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है।
कमजोर होने का अर्थ खतरा समाप्त होना नहीं
लेकिन कमजोर होने का अर्थ खतरा समाप्त होना नहीं है। तट से टकराने के बाद भी तेज हवाएं, मूसलाधार बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें, तूफानी ज्वार और नदियों में बाढ़ गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार चक्रवात से होने वाली क्षति का बड़ा कारण लगातार बारिश और निचले इलाकों में पानी भरना होता है।
चक्रवात में सबसे अधिक खतरा कहां होता है?
चक्रवात के केंद्र में अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र होता है, जिसे उसकी आंख कहा जाता है। इसके चारों ओर स्थित आंख की दीवार में आमतौर पर सबसे तेज हवाएं और शक्तिशाली वर्षा होती है। इसके अतिरिक्त, समुद्र के पानी का तटीय क्षेत्रों में प्रवेश, निचले इलाकों में बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन भी बड़े खतरे पैदा कर सकते हैं।
इसी कारण चक्रवात के खतरे का आकलन केवल हवा की गति से नहीं किया जाता। उसकी दिशा, बारिश की मात्रा, समुद्र के स्तर में संभावित वृद्धि और प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
समय पर चेतावनी और तैयारी से कम हो सकता है नुकसान
चक्रवात को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन समय रहते चेतावनी मिलने और प्रशासनिक तैयारी से जनहानि तथा संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। तटीय क्षेत्रों के लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। मछुआरों को समुद्र में जाने संबंधी चेतावनियों का पालन करना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर जाना चाहिए।
चक्रवात प्रकृति की एक शक्तिशाली घटना है, लेकिन वैज्ञानिक पूर्वानुमान, समय पर सूचना और लोगों की सतर्कता इसके प्रभाव को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
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