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ओडिशा में चक्रवात की आशंका के बीच बड़ी तैयारी, पूरा सरकारी तंत्र अलर्ट मोड पर

  • ‘जीरो कैजुअल्टी’ के लक्ष्य के साथ प्रशासन सक्रिय

  • सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द

  • चक्रवात आश्रय स्थलों को तैयार करने और संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने पर जोर

भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा कम दबाव का क्षेत्र संभावित चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका के बीच ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। संभावित खतरे को देखते हुए राज्य का प्रशासनिक तंत्र अलर्ट मोड पर है। सरकार का मुख्य जोर जनहानि को शून्य रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संसाधनों को तैयार रखने पर है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र पहले अवदाब और फिर गहरे अवदाब में बदल सकता है। इसके 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान का रूप लेने की आशंका है। इसके प्रभाव से 27 से 29 अक्टूबर के बीच ओडिशा के तटीय और दक्षिणी जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, तूफान की वास्तविक दिशा, तीव्रता और तट से टकराने के स्थान को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

उच्चस्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा

संभावित खतरे को देखते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने भुवनेश्वर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें मुख्य सचिव अनु गर्ग, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल, ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों तथा विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने भाग लिया। जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी तैयारियों की समीक्षा की गई।

बैठक में जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि हर परिस्थिति में लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया।

सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, मुख्यालय में रहने का निर्देश

आपदा प्रबंधन की तैयारियों को गति देने के लिए राज्यभर में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यस्थलों और निर्धारित मुख्यालयों पर उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं। बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसम की स्थिति बिगड़ने पर राहत, बचाव, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक समन्वय में किसी प्रकार की बाधा न आए।

चक्रवात आश्रय स्थलों में भोजन, पानी और बिजली की व्यवस्था

संभावित चक्रवात को देखते हुए निचले इलाकों और संवेदनशील बस्तियों में रहने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। इसके लिए बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रय स्थलों को तैयार किया जा रहा है।

आश्रय स्थलों में बिजली के वैकल्पिक इंतजाम, पीने का पानी और सूखा राशन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की स्थिति में बुनियादी सुविधाओं की कमी न हो।

गर्भवती महिलाओं और मरीजों पर विशेष ध्यान

प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उन महिलाओं की पहचान करने के निर्देश दिए हैं जिनका प्रसव निकट है। जरूरत के अनुसार उन्हें पहले ही नजदीकी अस्पतालों या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि खराब मौसम के दौरान चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी न हो।

इसके साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती

संभावित निकासी के दौरान लोगों के घर खाली रहने की स्थिति में चोरी और लूटपाट रोकने के लिए ओडिशा पुलिस को विशेष गश्त की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों को उनके घरों और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त करना है।

मौसम की वास्तविक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर जिलाधिकारियों को स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित करने का अधिकार भी दिया गया है।

एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन दल तैयार

संभावित आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन सेवा की टीमों को तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इन टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल भेजा जा सकेगा।

प्रशासन का ध्यान केवल तूफान के संभावित प्रभाव का सामना करने पर ही नहीं, बल्कि उससे पहले जरूरी इंतजाम पूरे करने पर भी है। राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय, निकासी योजना और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय को तैयारियों का अहम हिस्सा बनाया गया है।

पुरी, गंजाम और गजपति में रेड अलर्ट की आशंका

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अक्टूबर को पुरी, गंजाम और गजपति जिलों में अत्यंत भारी बारिश का खतरा हो सकता है। इन जिलों के लिए रेड अलर्ट की जानकारी दी गई है। इसके अलावा भद्रक, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, बालेश्वर, मयूरभंज, केंदुझर, रायगड़ा, कोरापुट, मालकानगिरि और कालाहांडी सहित अन्य जिलों में भी अलग-अलग स्तर की चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी है।

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने गहरे समुद्र में मौजूद मछुआरों को तट पर लौटने तथा समुद्र में जाने की तैयारी कर रहे मछुआरों को अपनी यात्रा स्थगित करने की सलाह दी है। समुद्र में प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार की अपील—घबराएं नहीं, निर्देशों का पालन करें

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने लोगों से घबराने और अपुष्ट सूचनाएं फैलाने से बचने की अपील की है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि चक्रवात की दिशा और संभावित प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के साथ आगे के कदम तय किए जाएंगे।

ओडिशा के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संभावित खतरे से पहले तैयारियों को पूरा करना है। चक्रवात आश्रय स्थलों को सक्रिय रखने, सरकारी तंत्र को उपलब्ध बनाए रखने, संवेदनशील आबादी की पहचान करने और बचाव दलों को तैयार रखने के जरिए सरकार किसी भी आपात स्थिति में जनहानि को न्यूनतम रखने की दिशा में काम कर रही है।

 

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