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एक ही खेत में खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
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ओडिशा में 2030 तक 1,000 मेगावाट कृषि-सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य
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एग्री-पीवी नीति 2026 को अंतिम रूप दे रही सरकार
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किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की पहल
इंडो एशिया टाइम्स नई दिल्ली
ओडिशा सरकार कृषि और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को एक साथ बढ़ावा देने के लिए एग्री-पीवी नीति 2026 को अंतिम रूप दे रही है। इस नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में 1,000 मेगावाट कृषि-सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ओडिशा के उपमुख्यमंत्री तथा कृषि एवं किसान सशक्तीकरण और ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक विश्व सम्मेलन 2026 में यह घोषणा की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल अन्नदाता तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ऊर्जादाता के रूप में भी सशक्त बनाना है। उन्होंने ‘एक खेत, दो उपज’ की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि कृषि उत्पादन को प्रभावित किए बिना खेतों में सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता में किसान और उसकी खेती सर्वोपरि रहेंगे, जबकि सौर पैनलों की स्थापना कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जाएगी।
90 प्रतिशत भूमि पर खेती अनिवार्य रखने का प्रस्ताव
प्रस्तावित नीति के अनुसार, प्रत्येक कृषि-सौर परियोजना के कम से कम 90 प्रतिशत क्षेत्र में सक्रिय खेती जारी रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही भूमि का कृषि संबंधी वर्गीकरण और फसल बीमा की पात्रता बनाए रखने के लिए कानूनी सुरक्षा प्रावधान किए जाएंगे। इससे कृषि भूमि को पूरी तरह सौर ऊर्जा परियोजनाओं में बदलने के बजाय खेती और बिजली उत्पादन के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।
इस व्यवस्था के अंतर्गत किसान अपनी पूंजी से कृषि-सौर प्रणाली स्थापित कर फसल और बिजली उत्पादन, दोनों से आय अर्जित कर सकेंगे। इसके अलावा वे सौर ऊर्जा विकासकर्ताओं के साथ साझेदारी कर दीर्घकालीन पट्टा किराये के माध्यम से नियमित आय प्राप्त करने का विकल्प भी चुन सकेंगे।
निवेशकों और परियोजना विकासकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रिडको के साथ 25 वर्षों के बिजली खरीद समझौते, उत्पादित बिजली की सुनिश्चित खरीद, ग्रिड कनेक्टिविटी और ओपन एक्सेस जैसी सुविधाओं का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार कृषि-सौर परियोजनाओं को ड्रिप सिंचाई, शीतगृह, सौर पंप और कृषि प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने में मिलेगी मदद
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा के कारण आने वाले दशकों में कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में खेतों के ऊपर उचित ऊंचाई पर लगाए गए सौर पैनल फसलों को अत्यधिक गर्मी से राहत देने, मिट्टी की नमी बनाए रखने और खेतों में काम करने वाले श्रमिकों को तेज धूप से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि और ऊर्जा उत्पादन के इस संयुक्त मॉडल से छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी मदद मिल सकती है।
67 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों के बाद नई पहल
ओडिशा की यह पहल राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2022 और फरवरी 2026 में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन के बाद आगे बढ़ाई जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, उस सम्मेलन में 6.8 गीगावाट क्षमता से संबंधित स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 67,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे।
कृषि-सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। इसके तहत एक मेगावाट क्षमता की कृषि-सौर परियोजना के साथ सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय के सहयोग से एक प्रायोगिक पहल भी की जा रही है। इसका उद्देश्य ओडिशा की कृषि परिस्थितियों के अनुकूल उन्नत तकनीकों का परीक्षण करना है।
सरकार के आकलन के अनुसार, राज्य में लगभग 40.7 लाख एकड़ उपयुक्त कृषि भूमि और 47.7 लाख एकड़ परती भूमि इस क्षेत्र में नई संभावनाएं प्रस्तुत करती है।
सम्मेलन के समापन पर कनक वर्धन सिंहदेव ने वैश्विक अनुसंधान संस्थानों, निजी निवेशकों और अन्य राज्यों से ओडिशा के साथ मिलकर किसान-केंद्रित कृषि-सौर ऊर्जा मॉडल विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल कुमार देव, कृषि एवं किसान सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव तथा राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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