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वैश्विक रासायनिक निवेशकों के लिए ओडिशा ने बिछाया रेड कारपेट

  • पारादीप बनेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग का बड़ा केंद्र

  • मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का वैश्विक निवेशकों को आमंत्रण

  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के विकास पर जोर

इंडो एशियन टाइम्स, मुंबई। 

ओडिशा को वैश्विक रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मुंबई में आयोजित इंडियाकेम 2026 के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक में वैश्विक उद्योग जगत को ओडिशा में निवेश का आमंत्रण देते हुए कहा कि राज्य सरकार परियोजना की योजना से लेकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य खनिज आधारित अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रसायन आधारित औद्योगिक विकास को गति देना और राज्य में उच्च मूल्यवर्धित विनिर्माण का मजबूत तंत्र विकसित करना है।

22 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने की। बैठक में मुख्यमंत्री ने ओडिशा की बंदरगाह सुविधाओं, औद्योगिक आधार, कच्चे माल की उपलब्धता, ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को निवेश के प्रमुख आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया।

पारादीप, धामरा और गोपालपुर में निवेश की व्यापक संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने पारादीप, धामरा और गोपालपुर को बंदरगाह आधारित उद्योगों के लिए प्रमुख निवेश स्थलों के रूप में रेखांकित किया। वहीं, अनुगोल और ढेंकानाल को धातु, कोयला, बिजली तथा औद्योगिक मांग से जुड़े निवेश के लिए उपयुक्त बताया। राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इपिकोल और टीम ओडिशा निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप भूमि, कच्चे माल, बिजली, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगी।

पारादीप स्थित पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर), इंडियन ऑयल की रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजनाएं और प्लास्टिक पार्क राज्य में नए उद्योगों के विकास के लिए आधार तैयार कर रहे हैं। इनके माध्यम से पॉलिमर, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र और अन्य औद्योगिक उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना है।

सरकार साझा अपशिष्ट शोधन संयंत्रों, भंडारण एवं परिवहन सुविधाओं, उपयोगिता गलियारों, पाइपलाइन संपर्क और समुद्र में उपचारित अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को भी विकसित कर रही है। गोपालपुर जैसे स्थानों पर पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त क्षेत्रों की उपलब्धता से परियोजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।

‘रेड कैटेगरी’ उद्योगों के लिए भी निवेश अनुकूल वातावरण

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ओडिशा सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए पारदर्शी, सुविधाजनक और समयबद्ध व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ‘रेड कैटेगरी’ के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी निवेश का अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की बात कही। हालांकि, इसके साथ सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा।

राज्य सरकार उद्योग विभाग, आईपीआईसीओएल, आईडीसीओ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वय स्थापित कर पर्यावरणीय मंजूरी, स्थापना की सहमति और संचालन की सहमति जैसी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम करेगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग स्तरों पर प्रक्रियागत अड़चनों का सामना कम करना पड़ेगा।

कोयले से रसायन, बैटरी सामग्री और हरित रसायनों पर नजर

ओडिशा सरकार ने निवेशकों को कोयले से रसायन उत्पादन, कोयला गैसीकरण से प्राप्त उत्पादों, विशेष रसायनों, फ्लोरोकेमिकल्स, बैटरी निर्माण सामग्री, उन्नत पॉलिमर, रेफ्रिजरेंट और हरित रसायन मूल्य शृंखला में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। गोपालपुर में हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया उत्पादन की संभावनाएं भी राज्य की औद्योगिक रणनीति का हिस्सा हैं।

राज्य में कई परियोजनाएं पहले से आगे बढ़ रही हैं। एसआरएफ लिमिटेड की गोपालपुर परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, जबकि यूपीएल लिमिटेड अपनी निवेश योजनाओं पर आगे बढ़ रही है। दीपक नाइट्राइट की गोपालपुर इकाई का उद्घाटन भी निकट बताया गया है। इसके अलावा, तलचर फर्टिलाइजर्स और बीसीसीएलजी कोयले से रसायन उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

इन परियोजनाओं से स्थानीय औद्योगिक आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने, कच्चे माल का बेहतर उपयोग करने और तैयार उत्पादों के माध्यम से अधिक आर्थिक मूल्य सृजित करने की संभावनाएं हैं।

वैश्विक तकनीकी साझेदारी और निवेश संपर्क पर जोर

उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा ने कहा कि ओडिशा के पास बंदरगाह संपर्क, मजबूत औद्योगिक आधार, प्राकृतिक संसाधन और डाउनस्ट्रीम विनिर्माण की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने उद्योग जगत से राज्य के साथ साझेदारी कर तकनीक आधारित, प्रतिस्पर्धी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के अनुरूप रसायन उद्योग विकसित करने का आह्वान किया।

गोलमेज बैठक के बाद ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल ने भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ रसायन एवं पेट्रोकेमिकल मंचों में भी भाग लिया। इन चर्चाओं में तकनीकी सहयोग, टिकाऊ विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय प्रमुख रहे। आईपीआईसीओएल की प्रबंध निदेशक अबोली सुनील नारवणे भी इन चर्चाओं में शामिल हुईं। प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया केम 2026 प्रदर्शनी का दौरा करने के साथ रसायन, वस्त्र और कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्योग प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें कीं।

मुख्यमंत्री ने संभावित निवेशकों से भूमि, कच्चे माल, ऊर्जा, परिवहन और आवश्यक मंजूरियों से जुड़ी अपनी जरूरतें राज्य सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं और उत्पादन क्षमता में बदलना है।

ओडिशा की यह पहल राज्य को खनिज एवं धातु उद्योगों से आगे बढ़ाकर रसायन, पेट्रोकेमिकल और उच्च मूल्यवर्धित विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यदि प्रस्तावित निवेश और औद्योगिक परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो इससे रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विकास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।

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