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कीट -कीस ने 20वें एशियाई खेलों और 23वें राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया
भुवनेश्वर। “पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब।”- भारत में पीढ़ियों से यह कहावत सुनाई जाती रही है, लेकिन 23 अक्टूबर को कीट और कीस ने 26 अंतर्राष्ट्रीय पदकों की उपलब्धि के साथ इस पुरानी सोच को गलत साबित कर दिया।
हमारे 57 खिलाड़ियों ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में 21 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वहीं, ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में 14 अन्य खिलाड़ियों ने पांच पदक हासिल किए।
इनमें से हर पदक के पीछे एक ऐसे व्यक्ति का विश्वास और दूरदर्शिता है, जिन्होंने दूसरों की नजरों में केवल एक विद्यार्थी में एक धावक की प्रतिभा देखी और दूसरों की नजरों में एक साधारण आदिवासी बच्चे में एक चैंपियन की क्षमता पहचानी। वह व्यक्ति हैं प्रो. अच्युत सामंत।
उन्होंने इसी विश्वास के साथ कक्षाओं और खेल के मैदानों का निर्माण किया, क्योंकि उनका मानना था कि किसी युवा को शिक्षा और खेल में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।
प्रो. सामंत ने खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खुली चयन प्रक्रिया और विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराईं, वह भी उस समय, जब दुनिया की नजरें इन खिलाड़ियों पर नहीं थीं।
आज उन्होंने खिलाड़ियों को 2.5 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में भारत के लिए प्रत्येक स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की भी घोषणा की।
अधिकांश संस्थान चैंपियन बनने के बाद खिलाड़ियों का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रो. सामंत पहले दिन से ही चैंपियन तैयार करने में विश्वास रखते हैं।
उनका यह संदेश है:
“खेलोगे-कूदोगे, बनोगे चैंपियन!”
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