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कोटिया मामले में आंध्र प्रदेश के हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट होने की अपील

  •     कोटिया सिर्फ जमीन नहीं, ओडिशा का गौरव है – कांग्रेस

  •     कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद वाहिनीपति ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर साझा संघर्ष का किया आह्वान

  •     कोटिया में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने पर दिया जोर

भुवनेश्वर। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच विवादित कोटिया क्षेत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जयपुर के कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद वाहिनीपति ने कोटिया में आंध्र प्रदेश के कथित चुनावी हस्तक्षेप और प्रशासनिक गतिविधियों पर चिंता जताते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर ओडिशा के हितों की रक्षा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोटिया केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि ओडिशा की विरासत, आदिवासी स्वाभिमान और क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक है।

वाहिनीपति ने जोर दिया कि कोटिया का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह राज्य की अस्मिता और वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। ऐसे में सभी दलों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और मीडिया को साझा मंच पर आकर क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए।

विकास से जीता जाए स्थानीय लोगों का विश्वास

कोटिया विवाद को लेकर नेताओं ने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई और न्यायिक प्रक्रियाएं जारी हैं। ऐसे में सभी संबंधित पक्षों को कानून का सम्मान करना चाहिए और स्थानीय लोगों के बीच किसी प्रकार का भ्रम पैदा करने से बचना चाहिए।

नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि कोटिया के निवासियों का विश्वास जीतने के लिए केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल और आजीविका के अवसरों जैसी बुनियादी सुविधाओं का लगातार विस्तार करना जरूरी है। स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराकर ही राज्य के साथ उनका जुड़ाव और मजबूत किया जा सकता है।

भक्त चरण दास के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा

कोटिया में यह घटनाक्रम ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद सामने आया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीनाक्षी वाहिनीपति और रामचंद्र कडाम भी शामिल थे।

क्षेत्र में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कोटिया की जमीनी स्थिति, स्थानीय निवासियों के अधिकारों और ओडिशा के व्यापक हितों के बारे में जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। नेताओं का कहना था कि क्षेत्र की समस्याओं को समझने और उनका समाधान सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय लोगों की आवाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जगन्नाथ संस्कृति और ओड़िया पहचान की रक्षा पर जोर

इस अवसर पर नेताओं ने दिवंगत कृष्ण चंद्र पाणिग्राही के योगदान को भी याद किया। सबर श्रीक्षेत्र श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कोटिया में जगन्नाथ संस्कृति के प्रचार-प्रसार और ओड़िया पहचान की रक्षा के संकल्प को दोहराया गया।

नेताओं ने कहा कि कोटिया की सांस्कृतिक जड़ों और ओडिशा की परंपराओं को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना वहां के निवासियों के अधिकारों और विकास संबंधी जरूरतों की रक्षा करना।

दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील

कांग्रेस नेताओं ने सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से कोटिया के मुद्दे पर साझा रुख अपनाने की अपील की। उनका मानना है कि कानूनी प्रयासों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति देना ही स्थानीय निवासियों के अधिकारों की रक्षा और ओडिशा के गौरव को बनाए रखने का प्रभावी रास्ता है।

कोटिया का विवाद केवल प्रशासनिक सीमाओं का प्रश्न नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के अधिकार, विकास और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है। ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान कानूनी प्रक्रिया के सम्मान, स्थानीय जनता के विश्वास और निरंतर विकास के माध्यम से तलाशना महत्वपूर्ण होगा।

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