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इंडियाकेम-2026 में मोहन माझी ने पेश किया औद्योगिक विकास का रोडमैप

  •     कहा-ओडिशा को रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का वैश्विक केंद्र बनाएंगे

  •     देश के रसायन उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए ओडिशा पूरी तरह तैयार

  •     2040 तक रसायन उद्योग को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में होगी अहम भूमिका

भुवनेश्वर। ओडिशा को खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 22 अक्टूबर 2026 को इंडियाकेम 2026 में मुख्य संबोधन देते हुए कहा कि ओडिशा देश के रसायन उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने नीति आयोग के उस राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख किया, जिसके तहत वर्ष 2040 तक भारत के रसायन उद्योग को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की परिकल्पना की गई है।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैश्विक निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस्पात और एल्युमिनियम उत्पादन में ओडिशा की मजबूत स्थिति राज्य को रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के विस्तार के लिए विशिष्ट अवसर प्रदान करती है। राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधन, औद्योगिक आधार, बंदरगाह और बेहतर व्यापारिक संपर्क इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने में सहायक हो सकते हैं।

पारादीप, गोपालपुर और धामरा बनेंगे विस्तार के प्रमुख आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में औद्योगिक गैसों, अम्लों और जल शोधन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आपूर्ति के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। इस्पात और एल्युमिनियम जैसे प्रमुख उद्योगों की मौजूदगी से रसायन क्षेत्र के लिए घरेलू बाजार भी उपलब्ध है। पारादीप, गोपालपुर और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाह कच्चे माल की आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादों के परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाते हैं।

पारादीप पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां इंडियन ऑयल की 1.5 करोड़ टन वार्षिक क्षमता वाली रिफाइनरी और लगभग 61,000 करोड़ रुपये की लागत वाला पेट्रोकेमिकल परिसर मौजूद है। यह औद्योगिक आधार राज्य में संबंधित उद्योगों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, गोपालपुर में फ्लोरोकेमिकल और हरित हाइड्रोजन परियोजनाएं, तालचेर में यूरिया उत्पादन के लिए कोयला गैसीकरण तथा लखनपुर में औद्योगिक उपयोग के अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन से जुड़ी परियोजनाएं ओडिशा को रसायन उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में योगदान दे सकती हैं।

निवेश के अनुकूल माहौल से उद्योग जगत का बढ़ा भरोसा

मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश के अनुकूल नीतियों और औद्योगिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति आयोग के 2026 निवेश अनुकूलता सूचकांक में ओडिशा शीर्ष पांच राज्यों में शामिल रहा है। वहीं, वर्ष 2026 के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में राज्य को पहला स्थान मिलने की बात भी उन्होंने कही।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों से कम समय में ओडिशा में 3.52 लाख करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 200 औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस अवधि में राज्य को कुल 22.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने सितंबर 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से रसायन, पेट्रोकेमिकल और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त संभावित निवेश के अवसर सामने आए हैं।

शोध और कौशल विकास पर रहेगा विशेष जोर

औद्योगिक विस्तार की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) और केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) जैसे संस्थान अनुसंधान, परीक्षण और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से उद्योगों को योग्य मानव संसाधन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इन संस्थानों के सहयोग से रसायन उद्योग से जुड़े सहायक क्षेत्रों और तैयार उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और औद्योगिक विकास को गति देने में मदद मिल सकती है।

ओडिशा में निवेश करें, राज्य की समृद्धि के भागीदार बनें

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने देश और विदेश के निवेशकों को ओडिशा में निवेश करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने साझेदारी और साझा विकास का संदेश देते हुए कहा कि आपकी सफलता हमारी सफलता है। आइए, ओडिशा में निवेश करें और एक समृद्ध ओडिशा के निर्माण में भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री के संबोधन से राज्य सरकार की उस रणनीति का संकेत मिलता है, जिसके तहत पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों के साथ उच्च मूल्यवर्धित रसायन, पेट्रोकेमिकल और उभरती औद्योगिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती हैं, तो ओडिशा को देश के प्रमुख रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

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