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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, कोटिया ओडिशा की अस्मिता, संप्रभुता और अखंडता का प्रतीक
भुवनेश्वर। पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा संबलपुर से धर्मेंद्र प्रधान ने कोटिया सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कोटिया ओडिशा और प्रत्येक ओड़िया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र राज्य की अस्मिता, संप्रभुता और अखंडता का प्रतीक है। लंबे समय से जारी सीमा विवाद निश्चित रूप से चिंता का विषय है और ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों को एकजुट होकर इसका समाधान निकालना चाहिए।
प्रधान ने कहा कि उन्होंने स्वयं अप्रैल 2018, फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में कोटिया गांव का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लिया था। क्षेत्र में आंध्र प्रदेश के बार-बार हस्तक्षेप और सीमा विवाद से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने विभिन्न स्तरों पर पहल भी की थी।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने 18 नवंबर 2020 और 31 अक्टूबर 2022 को ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखे थे। इसके अलावा, 22 सितंबर 2021 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को भी पत्र लिखकर समस्या के समाधान का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े विवाद के समाधान में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्च स्तर पर सौहार्दपूर्ण बातचीत के जरिए अनुकूल माहौल तैयार कर स्थायी समाधान का रास्ता निकालना आवश्यक है।
प्रधान ने ओडिशा की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा के लिए उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास, व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति, स्वभाव कवि गंगाधर मेहर और परलाखेमुंडी के महाराजा कृष्णचंद्र गजपति नारायण देव जैसे महान व्यक्तित्वों के त्याग और योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा और ओड़िया अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
प्रधान ने कहा कि ओडिशा की एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कोटिया विवाद का समाधान राज्यहित को सर्वोपरि रखते हुए मिलकर किया जाना चाहिए।
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