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नवीन पटनायक के समर्थन पर भड़के मनमोहन सामल
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रिहाई की मांग पर ओडिशा में भाजपा-बीजद आमने-सामने
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जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में हिरासत में बंद सीजेपी नेताओं की रिहाई की नवीन ने उठाई मांग
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी नेता पर साधा निशाना
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राष्ट्रवाद और संवैधानिक अधिकारों को लेकर तेज हुई राजनीतिक बहस
भुवनेश्वर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में हिरासत में बंद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की मांग ने ओडिशा की राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के समर्थन में उतरने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने उन पर तीखा हमला बोला है।
नवीन पटनायक ने जहां युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों में विश्वास बनाए रखने के लिए दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की, वहीं सामल ने उनके रुख पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रहित और राष्ट्रीय अखंडता का मुद्दा उठाया। दिल्ली में शुरू हुआ यह विवाद अब ओडिशा में भाजपा और बीजद के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया अखाड़ा बनता दिखाई दे रहा है।
नवीन का दांव : सरकार और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील
बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए अशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तत्काल समीक्षा करने और उन्हें रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में, भले ही इसके लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया गया हो, इतनी लंबी हिरासत जारी रहनी चाहिए या नहीं।
युवाओं का संवैधानिक अधिकारों में विश्वास कमजोर नहीं होना
नवीन ने अपने संदेश में न्यायपालिका और कार्यपालिका से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना था कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों में विश्वास कमजोर नहीं होना चाहिए।
नवीन के इस बयान को केवल हिरासत के मामले पर प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर एक राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने जिस मुद्दे को उठाया है, उसके दूसरे पक्ष में पुलिस का यह आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया था।
राष्ट्रहित से ऊपर नहीं हो सकती राजनीति – मनमोहन सामल
नवीन पटनायक के बयान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बीजद अध्यक्ष की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ नेता राष्ट्रीय हितों की तुलना में अपने राजनीतिक हितों को अधिक महत्व दे रहे हैं।
सामल ने नवीन को दिशाहीन बताते हुए कहा कि देश की एकता और अखंडता के विरुद्ध जाने वाली गतिविधियों का समर्थन जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने देशभक्ति को ओडिशा की जनता की भावना से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्रहित के प्रश्न पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
बीजद नेताओं की विचारधारा में भ्रम की स्थिति – भाजपा
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने नवीन पटनायक पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजू जनता दल (बीजद) अब दिशाहीन हो गई है और उसके नेताओं की विचारधारा में भ्रम की स्थिति है। उन्होंने कहा कि अराजक और राष्ट्रविरोधी शक्तियों का समर्थन राज्य की जनता स्वीकार नहीं करेगी।
मनमोहन सामल ने कहा कि बीजद के नेता आज एक बात कहते हैं और अगले दिन दूसरी बात करते हैं। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे किसके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पहले बीजद के नेता समान दूरी बनाए रखने की बात करते थे, लेकिन अब कभी किसी गठबंधन के साथ खड़े दिखाई देते हैं तो कभी उसी के आह्वान का विरोध करते हैं। इससे उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है।
अपने निजी हितों को महत्व दे रहे कुछ स्वयंभू नेता
सामल ने आरोप लगाया कि कुछ स्वयंभू नेता देशहित से अधिक अपने निजी हितों को महत्व दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं की सोच में वैचारिक भटकाव है और उन्हें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1965 और 1971 के युद्धों से लेकर एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक तक, देश की सुरक्षा से जुड़े अवसरों पर 140 करोड़ भारतीय एकजुट रहे हैं। ऐसे में देश में रहकर देश के खिलाफ बोलने वालों अथवा चीन और पाकिस्तान के समर्थन में बयान देने वालों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मनमोहन सामल ने कहा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल शक्तियों का समर्थन करना उचित नहीं है। जनता राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के रुख पर नजर रख रही है तथा उनके आचरण का आकलन कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता उचित समय पर इसका जवाब देगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। नवीन पटनायक ने जहां हिरासत की अवधि और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाया, वहीं सामल ने उनके रुख को राष्ट्रहित के नजरिये से चुनौती दी। इस तरह दोनों नेताओं के बीच बहस का केंद्र अब केवल सीजेपी नेताओं की हिरासत नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की राजनीतिक व्याख्या भी बन गई है।
तिहाड़ जेल में बंद हैं दोनों नेता
मामले के अनुसार, अशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। प्रशासन ने इससे पहले इस स्थल को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था।
पुलिस का आरोप है कि सीजेपी के सदस्यों ने एक निजी परिसर के बंद द्वार को पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया, वहां तिरंगा फहराया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।
दोनों नेताओं को शुरुआत में पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में 19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी। अधिकारियों ने कथित तौर पर कानून के प्रति अनादर और प्रतिबंधित स्थल पर दोबारा प्रदर्शन किए जाने की आशंका का हवाला दिया था।
उन पर अतिक्रमण, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, पूर्व में दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बंधपत्रों की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने से संबंधित आरोप हैं। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
शांतिपूर्ण विरोध को बनाया जा रहा है अपराध – सीजेपी
सीजेपी ने पुलिस की कार्रवाई को शांतिपूर्ण असहमति की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। संगठन के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशभक्ति के नारे लगाए। संगठन ने हिरासत की अवधि पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया है। संगठन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने आवश्यकता पड़ने पर रात में सुनवाई किए जाने का अनुरोध भी किया। दशहरा अवकाश के कारण अदालत में तत्काल सुनवाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई थी।
ओडिशा की राजनीति में छिड़ी बहस
नवीन पटनायक के बयान पर मनमोहन सामल की प्रतिक्रिया ने भाजपा और बीजद के बीच पहले से जारी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा इस प्रकरण को राष्ट्रहित और कानून के पालन के नजरिये से देख रही है, जबकि नवीन पटनायक ने युवाओं के संवैधानिक अधिकारों और कानून के शासन में विश्वास को प्राथमिकता दी है।
राजनीतिक दृष्टि से यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें राष्ट्रीय ध्वज, विरोध प्रदर्शन, न्यायिक हिरासत और नागरिक स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील विषय एक साथ जुड़ गए हैं। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख का असर सार्वजनिक बहस पर पड़ना स्वाभाविक है।
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