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डीजीपी विनयतोष मिश्र ने वीर जवानों को दी श्रद्धांजलि
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कर्तव्य निर्वहन के दौरान देशभर में 154 पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों के जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में बुधवार को 67वां पुलिस शहीद स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनयतोष मिश्र ने देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करते हुए कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके त्याग और धैर्य को नमन किया। कार्यक्रम में पुलिस बल की ओर से शहीदों को औपचारिक सलामी दी गई और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
डीजीपी मिश्र ने कहा कि 21 अक्टूबर, 1959 को लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 10 जवान शहीद हो गए थे। उन वीर जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पूरे देश में पुलिस शहीद स्मृति दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कुल 154 जवानों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है। डीजीपी ने कहा कि इन अमर शहीदों का अतुलनीय त्याग और कर्तव्यनिष्ठा पूरे पुलिस बल के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
माओवादी विरोधी अभियानों में शहीद जवानों को किया याद
डीजीपी ने ओडिशा में माओवादी विरोधी अभियानों के दौरान शहीद हुए राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों के साहस, त्याग और निरंतर प्रयासों के कारण राज्य में माओवादी हिंसा का मुकाबला करने और शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों के त्याग, धैर्य और योगदान के प्रति भी गहरा सम्मान व्यक्त किया।
पुलिस के सामने साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसी नई चुनौतियां
डीजीपी मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। आतंकवाद, माओवाद, संगठित अपराध, साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी से मुकाबला करने के साथ-साथ महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी पुलिस के प्रमुख दायित्व हैं।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के उपयोग और निरंतर प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से सुरक्षित, शांतिपूर्ण और अपराधमुक्त ओडिशा के निर्माण के लिए ईमानदारी, साहस और निष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को जनता का विश्वास और भरोसा जीतने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
विभिन्न राज्यों और केंद्रीय बलों के 154 जवान शहीद
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस वर्ष आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के एक-एक, असम के छह, बिहार के 12, छत्तीसगढ़ के छह, गुजरात के दो, हरियाणा के चार, झारखंड के तीन, कर्नाटक के पांच, केरल के एक, मध्य प्रदेश के नौ, महाराष्ट्र के दो, मणिपुर के एक, पंजाब के दो, राजस्थान के पांच, तमिलनाडु के छह, तेलंगाना के चार, उत्तर प्रदेश के छह, उत्तराखंड के एक, पश्चिम बंगाल के पांच, दिल्ली के तीन और जम्मू-कश्मीर के नौ जवानों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राण गंवाए।
इसके अतिरिक्त असम राइफल्स के छह, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 25, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के चार, सीआरपीएफ के दो, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के नौ, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पांच, अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड के एक तथा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आठ जवान शहीद हुए।
कार्यक्रम का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) प्रतीक महांती की देखरेख में किया गया। इस अवसर पर निदेशक (गुप्तचर) आरपी कोचे, निदेशक (विजिलेंस) यशवंत कुमार जेठवा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आधुनिकीकरण) एसके प्रियदर्शी, एसएफएसएल की निदेशक डॉ संतोष बाला, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे एवं तटीय सुरक्षा) अरुण बोथरा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विजिलेंस) असीत कुमार पाणिग्राही, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसएपी) राजेश कुमार और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एचआरपीसी) यतींद्र कोयल सहित पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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