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दुनिया तक पहुंचा ओडिशा का स्वाद
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‘टाइगर ब्राइट’ ने बढ़ाया आदिवासी किसानों का मान
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मुख्यमंत्री माझी ने जताया गर्व
भुवनेश्वर। कोरापुट की पहाड़ियों में आदिवासी किसानों द्वारा उगाई जाने वाली प्रीमियम अरेबिका कॉफी अब ओडिशा की पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचा रही है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स इंडिया समिट 2026 में कोरापुट की प्रसिद्ध कॉफी ब्रांड ‘टाइगर ब्राइट’ को अतिथियों को भेंट किया गया। इससे न केवल दुनिया के सामने ओडिशा की कॉफी का स्वाद पहुंचा, बल्कि आदिवासी किसानों की मेहनत, स्थानीय कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और टिकाऊ आजीविका की संभावनाओं को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ब्रिक्स समिट में कोरापुट कॉफी की मौजूदगी पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह ओडिशा की कहानी का एक और पक्ष दुनिया के सामने रख रही है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से वैश्विक मंचों पर ओडिशा के अवसरों, सामर्थ्य और संभावनाओं को सामने रख रहे हैं। ऐसे में ब्रिक्स इंडिया समिट में कोरापुट कॉफी की मौजूदगी विशेष खुशी का विषय है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला वैश्विक मंच
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कोरापुट कॉफी की पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के लोगों की मेहनत और राज्य की धरती की समृद्धि को राज्य की सीमाओं से बाहर पहचान मिलते देखना गर्व का क्षण है। उनके अनुसार, ऐसा ओडिशा दुनिया के सामने आना चाहिए जो अपनी मिट्टी से जुड़ा हो, अपनी पहचान पर गर्व करता हो और अपनी कहानी दुनिया के साथ आत्मविश्वास से साझा करता हो।
कोरापुट कॉफी की यह यात्रा केवल एक कॉफी ब्रांड की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव को दर्शाती है जिसमें आदिवासी किसान केवल कच्चे कृषि उत्पाद के उत्पादक न रहकर संगठित मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बन रहे हैं। खेती से लेकर खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
920 से 950 मीटर की ऊंचाई पर तैयार होती है प्रीमियम अरेबिका
कोरापुट के नंदापुर और माछकुंड क्षेत्र में लगभग 920 से 950 मीटर की ऊंचाई पर 100 प्रतिशत अरेबिका कॉफी की खेती होती है। यहां कॉफी के पौधे आम, कटहल और खट्टे फलों जैसे पेड़ों की प्राकृतिक छाया में विकसित होते हैं। कॉफी चेरी को पकने के उपयुक्त समय पर हाथ से तोड़ा जाता है और इसके बाद सावधानीपूर्वक प्रसंस्करण किया जाता है।
ट्राइबल डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (टीडीसीसीओएल) की निगरानी में कॉफी की खरीद, सुखाने, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया पूरी होती है। ‘कोरापुट कॉफी’ ब्रांड की औपचारिक शुरुआत 11 सितंबर 2019 को हुई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी किसानों द्वारा उत्पादित कॉफी के लिए संगठित बाजार तैयार करना और मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना था।
इस प्रयास का असर कॉफी की खरीद के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 में टीडीसीसीओएल ने रिकॉर्ड 102.54 मीट्रिक टन कॉफी फल की खरीद की, जबकि 2022-23 में यह मात्रा 34.68 मीट्रिक टन थी। वर्ष 2024-25 में 34.41 मीट्रिक टन कॉफी की खरीद हुई थी। वर्तमान में इस गतिविधि से करीब 360 आदिवासी परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
डिजिटल भुगतान से किसानों को सीधे मिला 1.07 करोड़ रुपये
कॉफी की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए टीडीसीसीओएल ने नकद भुगतान की पारंपरिक व्यवस्था के स्थान पर सीधे किसानों के बैंक खातों में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत आदिवासी कॉफी किसानों के खातों में 1.07 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए। इनमें 71 आदिवासी महिला किसान भी शामिल हैं।
कॉफी उत्पादकों की पहचान और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को आसान बनाने के लिए स्मार्ट कार्ड व्यवस्था भी शुरू की गई है। अब तक करीब 45.7 प्रतिशत कॉफी उत्पादक स्मार्ट कार्ड से जुड़े हैं।
संतरा, नींबू, कैरेमल और चॉकलेट जैसा स्वाद
‘टाइगर ब्राइट’ ने अपनी अलग स्वाद पहचान भी बनाई है। प्रीमियम अरेबिका कॉफी में संतरा, नींबू और मीठे नींबू जैसे उष्णकटिबंधीय फलों के स्वाद के साथ कैरेमल, चॉकलेट और कोको की हल्की झलक मिलती है। प्राकृतिक छाया में उगाई गई कॉफी को स्वच्छता मानकों के साथ तैयार कर ऊंचे लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर धूप में सुखाया जाता है।
हल्के, मध्यम और गहरे रोस्ट का संतुलित मिश्रण इसे एक अलग स्वाद प्रदान करता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी कोरापुट कॉफी को पहचान मिली है। इसे केवाईके 2024 में दो फाइन कप पुरस्कार मिले और कॉफी बोर्ड के फ्लेवर ऑफ इंडिया फाइन कप 2024 में इसे चौथा स्थान हासिल हुआ।
ओडिशा और दिल्ली में आठ कैफे, 10,634 से अधिक पैकेटों की बिक्री
कोरापुट कॉफी को खेतों से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए टीडीडीसीओएल ने ओडिशा और दिल्ली में आठ कोरापुट कॉफी कैफे स्थापित किए हैं। इनमें नालको दामनजोड़ी का कैफे भी शामिल है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन कैफे से 1.64 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई।
ब्रांड के तहत टाइगर ब्राइट के अलावा रोस्टेड बीन्स और इंस्टेंट कॉफी जैसे उत्पाद भी बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक 10,634 से अधिक पैकेट टाइगर ब्राइट का व्यावसायीकरण किया जा चुका है।
ब्रिक्स समिट में टाइगर ब्राइट की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने कोरापुट की पहाड़ियों में काम कर रहे आदिवासी किसानों की मेहनत को दुनिया के सामने रखने का अवसर दिया। यह उदाहरण बताता है कि भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पैदा होने वाले स्थानीय उत्पाद बेहतर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं।
कोरापुट की कॉफी अब केवल एक कृषि उत्पाद नहीं रह गई है। ‘टाइगर ब्राइट’ ओडिशा की मिट्टी, आदिवासी किसानों की मेहनत और स्थानीय उद्यमिता को दुनिया तक पहुंचाने वाला ब्रांड बनकर उभर रही है। ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंच पर इसकी मौजूदगी ने ‘लोकल से ग्लोबल’ की ओडिशा की संभावनाओं को एक नई पहचान दी है।
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