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200 से ज्यादा मामलों का निपटारा
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बीडीए की के-7 योजना के आवंटियों को बड़ी राहत
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भुवनेश्वर तहसीलदार को दो महीने में वास्तविक लाभार्थियों के नाम पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स दुरुस्त करने का निर्देश
भुवनेश्वर। तीन दशक से अधिक समय से जमीन के दस्तावेजों में उलझे कलिंग नगर के-7 प्लॉटेड डेवलपमेंट स्कीम के सैकड़ों लाभार्थियों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। राजस्व अभिलेखों में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजस्व मंडल के सदस्य सत्यव्रत साहू के निर्देश पर के-7 से जुड़े 200 से अधिक मामलों का निपटारा कर दिया गया है। अब भुवनेश्वर तहसीलदार को मूल आवंटन के आधार पर जमीन के क्षेत्रफल और स्वामित्व संबंधी विवरण में आवश्यक सुधार कर वास्तविक आवंटियों के नाम पर वर्तमान रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए दो महीने की समयसीमा तय की गई है।
1991 में मिला था प्लॉट, 2013-14 में रिकॉर्ड ने बढ़ाई मुश्किल
भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने वर्ष 1991 में कलिंग नगर के-7 प्लॉटेड डेवलपमेंट योजना के तहत कई लोगों को भूखंड आवंटित किए थे। आवंटन के बाद लाभार्थियों को उनके निर्धारित भूखंडों का अधिकार मिला, लेकिन बाद में राजस्व रिकॉर्ड में सामने आई विसंगतियों ने इन आवंटियों की परेशानी बढ़ा दी।
वर्ष 2013-14 के अंतिम बंदोबस्त अभियान के दौरान आवंटित भूखंडों से संबंधित रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में अलग-अलग क्षेत्रफल की जमीन ओडिशा सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग और अन्य के नाम दर्ज हो गई। इससे बीडीए से विधिवत भूखंड प्राप्त करने वाले लोगों को अपने ही भूखंड का राजस्व रिकॉर्ड अपने नाम कराने के लिए वर्षों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े।
लंबे समय तक मामला लंबित रहने से लाभार्थियों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।
संयुक्त जांच में सामने आई जमीन की वास्तविक स्थिति
मामलों के त्वरित समाधान के लिए राजस्व मंडल के सदस्य के निर्देश पर के-7 से जुड़े 200 से अधिक मामलों की संयुक्त सुनवाई को प्राथमिकता दी गई। इसके लिए बीडीए, सामान्य प्रशासन विभाग तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई।
टीम ने मौके पर जाकर प्राथमिकता के आधार पर जमीन का सत्यापन किया। मूल आवंटन दस्तावेजों के आधार पर भूखंड की वास्तविक स्थिति, क्षेत्रफल और स्थान की जांच की गई। मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल के बीच अंतर का भी परीक्षण किया गया। इसके बाद संयुक्त जांच की विस्तृत रिपोर्ट राजस्व मंडल के सदस्य के समक्ष प्रस्तुत की गई।
दो महीने में सुधरेगा रिकॉर्ड
संयुक्त जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर 10 सितंबर 2026 को के-7 प्लॉटेड डेवलपमेंट योजना से जुड़े 200 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। अंतिम आदेश में भुवनेश्वर तहसीलदार को मूल आवंटन के अनुरूप जमीन के क्षेत्रफल और स्वामित्व संबंधी विवरण में आवश्यक सुधार करने तथा लाभार्थियों के नाम पर वर्तमान आरओआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
इसके लिए दो महीने की निश्चित समयसीमा तय की गई है। रिकॉर्ड दुरुस्त होने और अपने नाम पर आरओआर मिलने के बाद लाभार्थियों को जमीन से संबंधित विभिन्न सरकारी सेवाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
के-7 के बाद के-8 के लाभार्थियों में भी जगी उम्मीद
के-7 मामले का समाधान केवल 200 से अधिक मामलों के निपटारे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 35 वर्षों से चली आ रही समस्या के अंत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे लाभार्थियों को अब अपने भूखंड का सही राजस्व रिकॉर्ड मिलने की उम्मीद जगी है।
इस पहल को नागरिक-केंद्रित राजस्व प्रशासन का उदाहरण भी माना जा रहा है। दशकों पुराने जमीन संबंधी मामलों को प्राथमिकता देना, बड़ी संख्या में मामलों का त्वरित निपटारा करना और रिकॉर्ड सुधार के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करना प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
के-7 के बाद बीडीए ने के-8 प्लॉटेड डेवलपमेंट योजना के लाभार्थियों की इसी तरह की भूमि रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी कदम उठाना शुरू कर दिया है। के-8 के लाभार्थियों में भी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।
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